नया भारत रच रही हैं फुन्दीबाई

- लोकेन्झसिंह को
उन्होंने अपनी पंचायत में ऐसी लड़कियों की सूची बनवाई जो स्कूल नहीं जा रही थीं और फिर उनके माता-पिता को प्रेरित करने का अभियान चलाते हुए उन्हें स्कूल जाने के लिए तैयार कर ही लिया। उन्हें समय जरूर लगा, परंतु उनकी कोशिश में रंग भर चुके थे। आज सारंगी में बालिकाओं ने हायर सेकंडरी की कक्षाओं में कदम रख दिया है और इस वर्ष करीब 22 बालिकाओं को स्कूल जाने के लिए शासकीय योजनाओं के चलते साइकल मिल चुकी है। फुन्दीबाई के हौसले और प्रयास का परिणाम तब निकलता हुआ दिखाई देता है कि जब पंचायत की बालिका से हम पूछते हैं कि वह क्या बनना चाहती है, तो वह दबंगता से कहती है- डॉक्टर...!



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