फातिमा भुट्टो : दर्द की फौलादी विरासत

फातिमा ने अपने पिता के कत्ल के बाद जब पहली बार उर्दू दैनिक 'जंग' और अँगरेजी के 'द न्यूज' में लेख लिखा तो उन्हें कई अखबारों ने बाद में साभार प्रकाशित किया। तब से लेकर अभी तक फातिमा नियमित लिख रही हैं। फातिमा ने पाकिस्तान में आए भूकम्प पर भी '8.50एएम' (8 अक्टूबर 2005) किताब लिखी तो उसे खूब पसंद किया गया। उर्दू में जब पत्रकार शाहिद मंसूर ने अनुवाद किया तो पाकिस्तान में कई संस्करण प्रकाशित हुए। फातिमा ने कराची के अमेरिकन स्कूल से तालीम लेने के बाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी (न्यूयॉर्क) से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। विषय था- मध्य एशियाई भाषाएँ और उनकी संस्कृति। बाद में लंदन से स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (एसओएएस) से दक्षिण एशियाई सरकारों और वहाँ की राजनीति के विषय में डिग्री ली।



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