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CoronaVirus : लॉकडाउन के बाद बढ़ने लगे हैं अपराध, रखें 10 सावधानियां

रविवार,अक्टूबर 11, 2020
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प्रतिवर्ष अक्टूबर के पहले शुक्रवार को 'विश्व मुस्कान दिवस' मनाया जाता है। खुश रहना हर कोई चाहता है लेकिन अक्सर हम परेशान रहते हैं। चिंता और तनाव हर किसी की जिंदगी में आते है,
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आज भी दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह मां का आंचल ही है।अपने बच्चों की खुशियों के लिए वो अपना आंचल सदा ईश्वर के समक्ष फैलाए रहती है। मां के आंचल-सा कोई संसार नहीं। पल्लू थामना, पल्लू पकड़ना, दामन पकड़ना, दामन थामना, आंचल में छिपना, ये सारे मात्र शब्द नहीं ...
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कहीं नन्हे फरिश्ते नए रूप और शुभ बंधन लेकर आ रहे हैं। इस पूरे जीवनक्रम और सामाजिकता की बात करें तो पहले आंगन, तंदूर, कुएं सांझे होते थे और सांझी होती थीं बेटियां।
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आपने नो मेकअप चैलेंज, साड़ी चैलेंज का नाम तो जरूर सुना ही होगा, हो सकता है की आप भी इस चैलेंज का हिस्सा बने हो......
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आम तौर पर सर्दी होने या शा‍रीरिक पीड़ा होने पर घरेलू इलाज के रूप में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि हल्दी वाले दूध के एक नहीं अनेक फायदे हैं? नहीं जानते तो हम बता रहे हैं-
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घर में राखी बनाने की विधि- घर में राखी बनाने के लिए एक कॉटन का धागा लें। इसके दोनों आखिरी भाग में सूई या तार डाल दें। इसके बाद आपको मोतियों की आवश्यकता पड़ेगी। आप चाहे तो गोल्डन या सिल्वर किसी भी कलर के मोतियों का उपयोग कर सकते हैं, जो आपको ...
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सुहाग चिन्हों के समर्थन में कई वैज्ञानिक तथ्य पेश किये जाते हैं और इन्हें स्त्री के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सभी सुहाग चिन्हों का संबंध स्त्री के स्वास्थ्य और जीवन से है। लेकिन आज की आधुनिक महिला ...
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हम कितना ही स्वतंत्रता का ढोल पीटें आज भी हमारे घरों में ही डलहौजी अजर अमर हो प्रेत की तरह साथ रहते हैं। समाज में सबके अंदर अमर बेल से बसे पड़े हैं। औरतों का निसंतान होना उनको अपमानित करना व गाली देने के सामान व्यवहार में लाया जाता है।
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मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे है....अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने की अलग-अलग कहानी है। जानिए कब, क्यों और कैसे हुई मदर्स डे मनाने की शुरुआत -
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मां देहरी पर सजती कुंकुम रंगोली है, घर को आलोकित करता निष्कंप दीपक है, अंजुलि से 'आदित्य' को चढ़ता आस्था का अर्घ्य है और चमकते चंद्रमा सा एक शीतल धैर्य है। वह जीवन की पाठशाला की गुरुजी ही नहीं बल्कि चॉक, कलम, पट्‍टी और तड़ातड़ पड़ती छड़ी भी वही है।
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हम जब इस महामारी से बाहर आएंगे तब परिवार के साथ बिताए इस समय, भावनाओं के बंधनों के निवेश को याद रखेंगे या भूल जाएंगे पता नहीं। किन्तु इस कठिन समय में लगी कुछ आदतें जरूर साथ रहेंगी।
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पुरुष वर्ग का यह बदला हुआ रूप और व्यवहार क्या कभी देखा जा सकता था , मतलब घर पर रहकर बर्तन मांजना , झाड़ू पोछा लगाना , सब्जी रोटी बनाना इत्यादि । तो , आप इस का श्रेय लॉक डाउन को दे सकते हैं । महिला वर्ग के लिए तो यह सब एक स्वप्न मात्र ही रहा था ।
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कोरोना की लड़ाई के बीच एक हरकत फिर की जा रही है वह है दो संप्रदायों के बीच वैमनस्य की खाई को चौड़ा करने की...सोशल मीडिया पर किसी हीबा बेग़ के लेख का हुसैन हैदरी द्वारा किया अनुवाद चल रहा है जिसका शीर्षक है ' भारत में मुसलमान होने का मतलब'...इस लेख ...
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भी जब मैं बगीचे के लान में बैठी यह पंक्तियां लिख रही हूं और मानव चलित गाड़ियां और लाउडस्पीकरों से ध्वनि प्रदूषण नगण्य है। मैं कम से कम 10-15 तरह के पक्षियों के कलरव से प्रसन्न और रोमांचित हो रही हूं।
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हम आपको बता रहे है कुछ ऐसे नायाब तरीके, जो न केवल आपकी कार को नए जैसा बना देंगे, बल्कि इस काम में आपकी जेब भी हल्की नहीं होगी।
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कोरोना के कहर से चल रहे लॉकडाउन ने कई बातें सोचने पर मजबूर कर दिया है..। जिनमें से एक है मानवता की सेवा...समाज की सेवा...मुझे भी लगा कि मैं किसी ज़रूरतमंद के काम आ सकूं..
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मुझे लगता है ये वो दिन हैं जब आप अपने जीवनसाथी के साथ बहुत खुबसूरत समय बिता सकते हैं..। अपने लिए तो हम हमेशा समय चुरा लेते हैं.... अपने परिवार के बाकी सदस्यों के साथ भी हमारा समय व्यतीत होता है..। लेकिन साथी के साथ ये पल दुबारा नही मिलेंगे..( और ...
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मेरे साथ 2.4 लाख घोषित (यूं तो ना जाने कितनी?) न्याय का इंतजार करते ऐसे मामलों की कई निर्भयाओं की आत्मा भी अभी अपने देश में तड़प रहीं हैं, गुहार लगा रहीं हैं और न जाने कितनी उम्र,जाति,धर्म संस्कारों के बोझ से तो मर ही गईं हैं और कईयों की आवाज ही दबा ...
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घर के बाहर की क्यारी में मेरे बचपन की हसरत को पूरा करने के लिए मैंने कनेर का पेड़ लगा रखा है। जिंदगी हमेशा वहीं लौटना चाहती है, जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं होता। बचपन, मासूमियत, पुराना घर, पुराने दोस्त, पुरानी हसरतें, पुरानी यादें। उनमें से ही एक है ...
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