वसंत पंचमी को क्यों कहते हैं 'प्रेम दिवस', जानिए 2 रहस्य

अनिरुद्ध जोशी| पुनः संशोधित बुधवार, 29 जनवरी 2020 (17:12 IST)
वसंत पंचमी को वेलेंटाइन डे की तरह की या प्रेम के इजहार का दिवस माना जाता है, लेकिन इस दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए इसका ज्यादा महत्व है बजाए प्रेम दिवस के। लेकिन आप जानिए ऐसे 2 कारण जिसके चलते इसे प्रेम दिवस कहा जाता है।

1.वसंत की बहार ऋतु परिवर्तन : इस दिन से प्रकृति का कण-कण वसंत ऋतु के आगमन में आनंद और उल्लास से गा उठता है। मौसम भी अंगड़ाई लेता हुआ अपनी चाल बदलकर मद-मस्त हो जाता है। प्रेमी-प्रेमिकाओं के दिल भी धड़कने लगते हैं। इस दिन से जो-जो पुराना है सब झड़ जाता है। प्रकृति फिर से नया श्रृंगार करती है। टेसू के दिलों में फिर से अंगारे दहक उठते हैं। सरसों के फूल फिर से झूमकर किसान का गीत गाने लगते हैं। कोयल की कुहू-कुहू की आवाज भंवरों के प्राणों को उद्वेलित करने लगती है। गूंज उठता मादकता से युक्त वातावरण विशेष स्फूर्ति से और प्रकृति लेती हैं फिर से अंगड़ाइयां। इसी कारण यह प्रेम के इजहार का दिवस माना जाता है।

2. कामदेव का दिवस : वसंत पंचमी को के रूप में भी मनाया जाता है। कामदेव का ही दूसरा नाम है मदन। इस अवसर पर ब्रजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रास उत्सव को मुख्य रूप से मनाया जाता है। औषध ग्रंथ चरक संहिता में उल्लेखित है कि इस दिन कामिनी और कानन में अपने आप यौवन फूट पड़ता है। ऐसे में कहना होगा कि यह प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए इजहारे इश्क दिवस भी होता है।


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