फिरोजाबाद में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, डेंगू व मलेरिया से जूझ रहे गांव को बांट दी एक्सपायरी दवाएं

हिमा अग्रवाल| पुनः संशोधित शुक्रवार, 10 सितम्बर 2021 (18:08 IST)
फिरोजाबाद में डेंगू और वायरल बुखार ने पैर पसार रखे हैं। शासन की निगाहें भी सीधे फिरोजाबाद पर टिकी हुई हैं। ऐसे में की एक बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र धनपुरा में कर्मचारियों की लापरवाही के चलते मरीजों को एक्सपायरी दवाएं बांट दी गई।

मामला उजागर होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने मामले पर संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी है। फिरोजाबाद के शिकोहाबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डेंगू और मलेरिया बुखार के प्रकोप से बचाने के लिए आमरी गांव में मरीजों को दवा वितरित की जा रही थी। वितरित दवाइयों में एक्सपायरी दवा भी थी, जो ग्रामीणों को वितरित की गई है।

इसकी जानकारी जैसे ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को लगी तो, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आमरी गांव मे डेंगू व मलेरिया से दो दर्जन से अधिक बच्चे, महिलाएं और पुरूष मरीज मिले थे।

सतर्कता की दृष्टि से बीते बुधवार को धनपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एक चिकित्सकों का दल गांव में चेकअप के लिए गया और वहां बुखार, बदन दर्द
व अन्य टेबलेट वितरित करके टीम वापस लौट आई।

गांव के अधिकांश लोग अशिक्षित होने के कारण रैपर पर एक्सपायरी नही पढ़ पाए, लेकिन एक पढ़े-लिखे युवक की नजर रैपर पर लिखी एक्पायरी डेट पर चली गई। रैपर पर अप्रैल-21 में ही एक्सपायरी थी। जब अन्य टेबलेट के रैपर को चेक किया गया तो उन पर जून 21 में एक्सपायर लिखा हुआ था।

वही तभी सूचना आई कि गांव की एक गर्भवती महिला प्रियंका की एक्सपायरी दवा खानें से हालात बिगड़ गई, जिसको शिकोहाबाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगभग 200 लोगों को दवा वितरित की थी। जिसके चलते ग्रामीणों का जीवन खतरे में पड़ सकता था। स्वास्थ्य विभाग को इन जीवनदायिनी दवाओं को एक्सपायर हो जाने के बाद नष्ट कर देना चाहिए था।

वहीं, एक्सपायरी दवाओं के वितरण को लेकर उप जिला अधिकारी देवेंद्र पाल का कहना है कि गांव में त्रुटिवश इन दवाओं का वितरण हो गया है। गांव में फिलहाल जिन ग्रामीणों को दवा दी गई थी, उन्हें इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया है। जल्दी ही पुनः सही दवाओं को गांव में वितरण किया जाएगा।

प्रश्न उठता है कि एक बीमारी से बचाने के लिए दवा दी गई थी, वही दवा जानलेवा भी साबित हो सकती थी। इस लापरवाही के लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई होना भी जरूरी है।



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