मीना कुमारी ने लिखी थी यह 5 गजलें ...

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टुकड़े-टुकड़े दिन बीता...
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आंचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूंदों में, जहर भी है और अमृत भी
आंखें हंस दी दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाहा दिल को समझें, हंसने की आवाज सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली
मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों तक आते-आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आंखों में, सादा-सी जो बात मिली।



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