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किसान, मध्यम वर्ग पर मेहरबान हो सकती है सरकार, बजट में हो सकती है तोहफों की बारिश

Updated: बुधवार, 30 जनवरी 2019 (17:20 IST)
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले पेश होने वाले अंतरिम बजट में सरकार किसानों और मध्यम वर्ग को लुभाने के लिए उन पर तोहफों की बारिश कर सकती है। मोदी सरकार के पांच साल के कार्यकाल में यह पहला मौका होगा जब केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली बजट पेश नहीं करेंगे। वह बीमारी के कारण अमेरिका में इलाज करा रहे हैं और उनकी जगह वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल 1 फरवरी को बजट पेश करेंगे।


इस बजट में सरकार किसानों और मध्यम वर्ग पर अपना फोकस रखेगी। किसान देश की आबादी में 60 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं और उसके बाद मध्यम वर्ग सबसे बड़ा वर्ग है। इसलिए माना जा रहा है कि चुनाव से पहले इन दोनों वर्गों को लुभाने में सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी।

जेटली ने पहले ही कहा दिया है कि इस बार का अंतरिम बजट लेखानुदान मांगों से कुछ अधिक होगा। उनके इस बयान से यह कयास लगाया जा रहा है कि सरकार जून-जुलाई तक के लिए लेखानुदान मांगें पेश करने के साथ ही कुछ घोषणाएं भी कर सकती है।

पिछले चार साल में सरकार ने किसानों की कर्ज माफी जैसे किसी पैकेज की बजाय अब तक उनकी आमदनी बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ढांचागत सुधारों के उपायों पर फोकस किया है। उसने विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में बढ़ोतरी के रूप में पिछले एक साल में किसानों को जरूर कुछ राहत दी है, लेकिन देश के गांवों और किसानों की स्थिति देखते हुए इसका अब तक कोई बहुत फायदा नजर नहीं आ रहा है।

दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में किसानों तथा कृषि को लेकर अलग से एक प्रस्ताव पेश किया गया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत हर वक्ता ने अपने भाषण किसानों के मुद्दे पर लंबी बात की। इससे साफ है कि सरकार अन्नदाता के साथ ही वोट बैंक के रूप में भी किसानों का महत्त्व समझती है।

कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने हाल ही कहा था कि किसानों के लिए बड़े पैकेज के बारे में जल्द घोषणा संभव है। पहले उम्मीद की जा रही थी कि इस पैकेज को पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी देने के बाद बजट में जगह मिलेगी, लेकिन अब लगता है कि इसकी घोषणा सीधे बजट में होगी।

सरकार ने पिछले चार वर्ष के दौरान व्यक्तिगत आयकर में कोई बड़ी राहत नहीं दी है। जो राहत मिली है वह भी मानक छूट के रूप में दी गई है। माना जा रहा है कि इस बजट में आयकर की सीमा में बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है। मीडिया में आई कुछ रिपोर्टों में इसके पांच लाख रुपए किए जाने के भी कयास लगाए गए हैं।

उद्योगों को प्रत्यक्ष कर में बड़ी राहत की उम्मीद कम है। आयकर में छूट और वस्तु एवं सेवाकर में हाल के दिनों में कई वस्तुओं को निचले स्लैबों में रखने से सरकार की आमदनी प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही किसानों के लिए यदि राहत पैकेज घोषित होता है तो इसका भी असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा। चालू खाता घाटे में सरकार पहले ही लक्ष्य से चूक चुकी है। ऐसे में उद्योग जगत के लिए आयकर में छूट की उम्मीद कम है।

रेल बजट को लेकर माना जा रहा है कि चुनाव साल में सरकार किराया बढ़ाने का जोखिम नहीं उठाएगी। बुनियादी ढांचों और क्षमता वर्द्धन पर उसका जोर रहेगा। रेलवे ट्रैकों के दोहरीकरण, तिहरीकरण और विद्युतिकरण पर सरकार खर्च बढ़ा सकती है। इसके लिए राजस्व जुटाने के लिए आम लोगों पर बोझ डाले बिना गैर-किराया राजस्व संसाधनों के बारे में घोषणाएं हो सकती हैं।

रेलमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि मेक इन इंडिया के तहत लोको-लेस 'ट्रेन-18' का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए बजट में प्रावधान होगा। सामान्य श्रेणी के यात्रियों के लिए भी घोषणा की जा सकती है।

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