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गुरु हर किशन जयंती, जानें इस महान सिख धर्मगुरु के बारे में 6 अनसुनी बातें

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 16 जुलाई 2025 (10:10 IST)
Life of Guru Har Krishan: गुरु हर किशन जी का प्रकाश पर्व या जयंती प्रतिवर्ष श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस अवसर पर आइए यहां जानते हैं सिख धर्म के इस महान गुरु के बारे में, जिनके दर्शन मात्र से दुख दूर हो जाते थे।ALSO READ: सिखों के 8वें गुरु, गुरु हर किशन की पुण्यतिथि, जानें उनके बारे में
 
1. गुरु हर किशन देव जी: 'बाला पीर' के नाम से विख्यात- गुरु हर किशन देव जी सिख धर्म के आठवें गुरु थे। उनका जन्म सन् 1656 ई. यानी विक्रम संवत 1713, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को कीरतपुर साहिब, पंजाब में हुआ था। वे सिखों के सातवें गुरु, गुरु हर राय साहिब जी और माता किशन कौर के दूसरे पुत्र थे।
 
2. सबसे कम उम्र में गुरु गद्दी: गुरु हर किशन देव जी ने मात्र पांच वर्ष की अल्पायु में गुरु गद्दी संभाली थी। उनके पिता, गुरु हर राय जी ने अपने बड़े पुत्र राम राय को सिख मर्यादाओं से भटकने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया था। इसलिए, उन्होंने अपने सबसे छोटे पुत्र हरकिशन जी को ही अपना उत्तराधिकारी चुना। इतनी कम उम्र में गुरु बनने के कारण उन्हें 'बाला पीर' या बाल गुरु के नाम से भी जाना जाता है।
 
3. जीवन और महत्वपूर्ण योगदान: गुरु हर किशन देव जी का जीवनकाल बहुत छोटा रहा, वे मात्र 8 वर्ष की आयु में ज्योति-जोत समा गए, लेकिन अपने छोटे से जीवन में उन्होंने ऐसे कार्य किए कि उन्हें आज भी महान श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। इतनी कम उम्र में भी गुरु हर किशन देव जी की सूझबूझ और आध्यात्मिक ज्ञान असाधारण था। उनके पिता अक्सर उनकी और उनके बड़े भाई की परीक्षाएं लेते थे, जिसमें हरकिशन जी हमेशा खरे उतरते थे।

जब गुरु हर किशन देव जी दिल्ली आए, तो वहां हैजा और चेचक जैसी भयानक महामारियां फैली हुई थीं। मुगल बादशाह औरंगजेब की असंवेदनशीलता के बीच, गुरु साहिब ने जात-पात या ऊंच-नीच का कोई भेद किए बिना स्वयं दिन-रात बीमार और गरीब लोगों की सेवा की। उन्होंने मरीजों को दवाइयां दीं और उनका मनोबल बढ़ाया।
 
4. 'जिस डिठै सभे दुख जाए': सिख धर्म की अरदास में कहा जाता है, 'जिस डिठै सभे दुख जाए', जिसका अर्थ है 'जिनके दर्शन मात्र से सारे दुख दूर हो जाते हैं।' यह पंक्ति गुरु हर किशन देव जी को समर्पित है। ऐसी मान्यता थी कि उनके दर्शन से ही लोगों के कष्ट दूर हो जाते थे।
 
5. गुरुद्वारा बंगला साहिब: दिल्ली का प्रसिद्ध गुरुद्वारा बंगला साहिब उसी स्थान पर बना है, जहां गुरु हर किशन देव जी ने दिल्ली में प्रवास किया था और लोगों की सेवा की थी। इस गुरुद्वारे का सरोवर आज भी अपनी पवित्रता और उपचार गुणों के लिए विख्यात है।
 
6. 'बाबा बकाले': अपनी मृत्यु से पहले, जब उनसे अगले गुरु के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने केवल 'बाबा बकाले' कहा। इससे गुरु तेग बहादुर जी को अगले गुरु के रूप में पहचाना गया, जो उस समय बकाला गांव में तपस्या कर रहे थे।
 
गुरु हर किशन देव जी ने अपने छोटे से जीवन से ही निस्वार्थ सेवा, आध्यात्मिक ज्ञान और मानव कल्याण का जो संदेश दिया, वह आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि आयु नहीं, बल्कि कर्म और निष्ठा ही किसी व्यक्ति की महानता तय करते हैं।
 
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