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मासिक शिवरात्रि पर शिवजी को कैसे करें प्रसन्न

Updated: शुक्रवार, 6 अगस्त 2021 (13:30 IST)
श्रावण माह की शिवरात्रि का बड़ा महत्व है। सावन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि व्रत रखा जाता है। इस बार अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार सावन शिवरात्रि व्रत 6 अगस्त 2021, शुक्रवार को है। आओ जानते हैं कि मासिक शिवरात्रि पर शिव को कैसे करें प्रसन्न। शिवजी के आशीर्वाद से सभी तरह के संकट मिट जाते हैं और सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
 
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1. इस दिन भगवान शिव को सफेद आंकड़े के फूल, बिल्व पत्र और भांग, धतूरा चढ़ाएं। 
 
2. इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से करना चाहिए।
 
3. इस दिन कई लोग रुद्राभिषेक करके भी भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं। 
 
4. पूजा के 5 प्रकार में से एक है इज्या। उपचारों के द्वारा अपने आराध्य देव की पूजा करना 'इज्या' के अंतर्गत आती है।
 
5. पूजन के 16 उपचार होते हैं- जैसे 1. पांच उपचार, 2. दस उपचार, 3. सोलह उपचार। आप जिस भी उपचार के माध्यम से पूजा करना चाहते हैं करें।
 
1. पांच उपचार : गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य।
2. दस उपचार : पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र निवेदन, गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य।
3. सोलह उपचार : पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार। पूजन के अंत में सांगता सिद्धि के लिए दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए।
 
सावन शिवरात्रि की पूजा :
1. शिवरात्रि के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है।
 
2.शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
 
3. उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति स्थापित कर उनका जलाभिषेक करें।
 
4. फिर शिवलिंग पर दूध, फूल, धतूरा आदि चढ़ाएं। मंत्रोच्चार सहित शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल एवं बेल की पत्तियां चढ़ाएं। माता पार्वती जी को सोलह श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं।
 
5. इसके बाद उनके समक्ष धूप, तिल के तेल का दीप और अगरबत्ती जलाएं।
 
6. इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
 
7. पूजा के अंत में शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करें।
 
8. पूजा समाप्त होते ही प्रसाद का वितरण करें।
 
9. शिव पूजा के बाद शिवरात्रि व्रत की कथा सुननी आवश्यक है।
 
10. व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए।
 
11. दिन में दो बार (सुबह और सायं) भगवान शिव की प्रार्थना करें।
 
12. संध्याकाल में पूजा समाप्ति के बाद व्रत खोलें और सामान्य भोजन करें।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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