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ये 5 समय विष्णुजी के, करेंगे पूजा तो मिलेगी सुख समृद्धि

शनिवार,फ़रवरी 13, 2021
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हम यहां पर व्रतों का वर्षिक चक्र संक्षिप्त में बता रहे हैं जिन्हें करने से निरोगी काया प्राप्त की जा सकती है। इन निम्मलिखित में से किसी भी एक को जीवनभर पाल लिया तो हर तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं।
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पौराणिक गाथाओं के अनुसार भगीरथी नदी गंगा की उस शाखा को कहते हैं, जो गढ़वाल (उत्तरप्रदेश) में गंगोत्री से निकलकर देवप्रयाग में अलकनंदा में मिल जाती है व गंगा का नाम प्राप्त करती है। ब्रह्मा से लगभग 23वीं पीढ़ी बाद और राम से लगभग 14वीं पीढ़ी पूर्व ...
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जो जन्मा है वह मरेगा ही चाहे वह मनुष्‍य हो, देव हो, पशु या पक्षी सभी को मरना है। ग्रह और नक्षत्रों की भी आयु निर्धारित है और हमारे इस सूर्य की भी। इसे ही जन्म चक्र कहते हैं। जन्म मरण के इस चक्र में व्यक्ति अपने कर्मों और चित्त की दशा अनुसार नीचे की ...
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सुबह आंखें खुलने के पहले व्यक्ति जाग जाता है। जागने के बाद आंखें खोलता है और आंखें खोलते ही मस्तिष्क भी धीरे-धीरे जागने लगता है। यह समझना जरूरी है कि जिस तरह सूर्योदय के पहले उजाला होने लगता है और फिर बाद में सूर्य दिखाई देता है, ठीक उसी तरह व्यक्ति ...
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माता काली की पूजा या भक्ति करने वालों को माता सभी तरह से निर्भीक और सुखी बना देती हैं। वे अपने भक्तों को सभी तरह की परेशानियों से बचाती हैं। जिस प्रकार अग्नि के संपर्क में आने के पश्चात् पतंगा भस्म हो जाता है, उसी प्रकार काली देवी के संपर्क में आने ...
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हिन्दू धर्म में वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का बहुत ही महत्व माना गया है। बहुत से त्योहार तो वृक्ष से ही जुड़े हुए हैं जैसे वट सावित्री व्रत, आंवला नवमी, तुलसी पूजा, अश्वत्थोपनयन व्रत आदि कई ऐसे व्रत और त्योहार हैं जो पेड़ पौधों से जुड़े हुए हैं। आओ ...
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पार्वती के पुत्र गजानन गणेश के भक्तों के समूह को ही गाणपत्य संप्रदाय का माना जाता है, जो गूढ़ हिंदू संप्रदाय के सदस्य हैं। इस संप्रदाय का प्रचलन महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में था। भगवान गणेश की प्रतिमा और उनकी पूजा दुनियाभर की प्राचीन सभ्यताओं ...
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भारतीय परम्परा में जीवन का ध्येय पुरुषार्थ को माना गया है। धर्म का ज्ञान होना जरूरी है तभी कार्य में कुशलता आती है कार्य कुशलता से ही व्यक्ति जीवन में अर्थ अर्जित कर पाता है। काम और अर्थ से इस संसार को भोगते हुए मोक्ष की कामना करनी चाहिए। ये चार ...
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खाना बनाना भी एक कला है। हालांकि जो मिले, वही खा लें, इसी में भलाई है। खाने के प्रति लालसा नहीं रखनी चाहिए, लेकिन खाने की क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद और हिन्दू धर्म अनुसार भोजन से ही रोग उत्पन्न होते हैं और भोजन की आदत बदलने से ...
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यह तो सुना ही होगा नमक हराम और नमक हलाल। लाल किताब और ज्योतिष की अन्य किताबों के अलावा नमक के बारे में समाज में निम्नलिखित बातें प्रचलित है। हालांकि इन बातों के पीछे सचाई ढूंढना या इनके खिलाफ तर्क देना का कोई मतलब नहीं। जनश्रुतियां परंपरा से प्राप्त ...
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रविवार की दिशा पूर्व है किंतु गुरुवार की दिशा ईशान है। ईशान में ही देवताओं का स्थान माना गया है। यात्रा में इस वार की दिशा पश्चिम, उत्तर और ईशान ही मानी गई है। इस दिन पूर्व, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में यात्रा त्याज्य है। गुरुवार की प्रकृति क्षिप्र है। ...
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पूजा को नित्यकर्म में शामिल किया गया है। पूजा किसी देवता या देवी की मूर्ति के समक्ष की जाती है जिसमें गुड़ और घी की धूप दी जाती है, फिर हल्दी, कंकू, धूप, दीप और अगरबत्ती से पूजा करके उक्त देवता की आरती उतारी जाती है। पूजा में सभी देवों की स्तुति की ...
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हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है। परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी बाहिनी तरफ से घूमना। इसको 'प्रदक्षिणा करना' भी कहते हैं, जो षोडशोपचार पूजा का एक अंग है। प्रदक्षिणा की प्रथा अतिप्राचीन है। वैदिक ...
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खाना बनाना भी एक कला है। हालांकि जो मिले, वही खा लें, इसी में भलाई है। खाने के प्रति लालसा नहीं रखनी चाहिए, लेकिन खाने की क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद और हिन्दू धर्म अनुसार भोजन से ही रोग उत्पन्न होते हैं और भोजन की आदत बदलने से ...
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भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा के अलग अलग समय नियुक्त हैं। यदि सही समय में सावधानी एवं नियम का पालन करके शिवजी की पूजा या आराधना की जाए तो उसका तुरंत ही असर होता है। यदि आप पूजा नहीं करते हैं तो कम से कम इन दिनों में आपको पवित्र बने रहना आवश्यक ...
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सिर के पहनावे को कपालिका, शिरस्त्राण, शिरावस्त्र या शिरोवेष कहते हैं। यह कपालिका कई प्रकार की होती है। प्रत्येक प्रांत में यह अलग-अलग किस्म, नाम, रंग और रूप में होती है। राजा-महाराजाओं के तो एक से एक स्टाइल के टोप, पगड़ी या मुकुट हुआ करते थे लेकिन ...
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हिंदू सनातन धर्म भाग्यवादियों का धर्म नहीं है। वेद, उपनिषद और गीता- तीनों ही कर्म को कर्तव्य मानते हैं। यही पुरुषार्थ है, जो व्यक्ति भाग्य, ज्योतिष या भगवान भरोसे हैं उसको भी कर्म किए बगैर छुटकारा नहीं मिलने वाला। धर्मशास्त्र और नीतिशास्त्रों में ...
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हिन्दू मास ( hindu masa ) को समझना थोड़ा कठिन है- मूलत: चंद्र मास को देखकर ही तीज-त्योहार मनाए जाते हैं। सबसे ज्यादा यही प्रचलित है। इसके अलाव नक्षत्र मास, सौर मास और अधिमास भी होते हैं। भारतीय पंचाग के अनुसार हिन्दु कैलेण्डर में 12 माह होते है ...
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नर्मदा नदी मध्य प्रदेश और गुजरात की जीवन रेखा है, परंतु इसका अधिकतर भाग मध्यप्रदेश में ही बहता है। मध्यप्रदेश के तीर्थ स्थल अमरकंटक से इसका उद्गम होता है और नेमावर नगर में इसका नाभि स्थल है। फिर ओंकारेश्वर होते हुए ये नदी गुजरात में प्रवेश करके ...
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