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कुल देवी या देवता को 4 उपाय से मनाएं और संकटों से मुक्ति पाएं

मंगलवार,मई 11, 2021
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यदि निम्नलिखित 10 नियम आपने अपना लिए तो निश्चित ही शर्तिया आपको कभी भी कोई गंभीर रोग नहीं होगा और आप जीवनभर निरोगी बने रहेंगे, परंतु उससे पूर्व आपको 3 शर्तों का पालन करना होगा। जैसे कुछ पाने के लिए खोना पड़ता है उसी तरह यह 3 शर्तें अपनाएं।
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सुबह आंखें खुलने के पहले व्यक्ति जाग जाता है। जागने के बाद आंखें खोलता है और आंखें खोलते ही मस्तिष्क भी धीरे-धीरे जागने लगता है। यह समझना जरूरी है कि जिस तरह सूर्योदय के पहले उजाला होने लगता है और फिर बाद में सूर्य दिखाई देता है, ठीक उसी तरह व्यक्ति ...
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कई लोग यह देखते भी नहीं है कि कहां हंसी-मजाक करना चाहिए और कहां नहीं। कहां हंसाना चाहिए और कहां नहीं। उनके लिए समय और काल का कोई महत्व नहीं होता है। कई बार हंसना दु:खदायी भी हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि गरुड़ पुराण सहित अन्य ग्रंथों में ...
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हम यहां पर व्रतों का वर्षिक चक्र संक्षिप्त में बता रहे हैं जिन्हें करने से निरोगी काया प्राप्त की जा सकती है। इन निम्मलिखित में से किसी भी एक को जीवनभर पाल लिया तो हर तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं।
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कहते हैं कि जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन। जैसे होगा मन वैसे होगा विचार और भाव। जैसा होगा विचार और भाव वैसा ही होगा आपका व्यवहार और भविष्य। इसीलिए हिन्दू धर्म में भोजन के तीन प्रकार बताए गए हैं। सात्विक भोजन, राजसिक भोजन और तामसिक भोजन। यहां ...
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जो जन्मा है वह मरेगा ही चाहे वह मनुष्‍य हो, देव हो, पशु या पक्षी सभी को मरना है। ग्रह और नक्षत्रों की भी आयु निर्धारित है और हमारे इस सूर्य की भी। इसे ही जन्म चक्र कहते हैं। जन्म मरण के इस चक्र में व्यक्ति अपने कर्मों और चित्त की दशा अनुसार नीचे की ...
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पौराणिक गाथाओं के अनुसार भगीरथी नदी गंगा की उस शाखा को कहते हैं, जो गढ़वाल (उत्तरप्रदेश) में गंगोत्री से निकलकर देवप्रयाग में अलकनंदा में मिल जाती है व गंगा का नाम प्राप्त करती है। ब्रह्मा से लगभग 23वीं पीढ़ी बाद और राम से लगभग 14वीं पीढ़ी पूर्व ...
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हिन्दू धर्म में सूतक और पातक नाम से दो परंपराएं प्रचलित हैं। किसी के भी घर-परिवार में कोई शांत हो जाते हैं या स्वर्ग चला जाता है तो उस परिवार या घर में सूतक लग जाता है। मृतक के जितने भी खून के रिश्ते के बंधु बंधव होते हैं उनक सभी के घरों में सूतक ...
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भोजन, पानी और हवा गुणवत्तापूर्ण नहीं है तो रोग उत्पन्न होते हैं। हिन्दू शास्त्रों और आयुर्वेद में इस संबंध में कई तरह की बातों का खुलासा किया गया है। सबसे जरूरी है पानी। पानी को प्राकृतिक तरीके से छानकर पीएं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन से मौसम ...
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खाना बनाना भी एक कला है। हालांकि जो मिले, वही खा लें, इसी में भलाई है। खाने के प्रति लालसा नहीं रखनी चाहिए, लेकिन खाने की क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद और हिन्दू धर्म अनुसार भोजन से ही रोग उत्पन्न होते हैं और भोजन की आदत बदलने से ...
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भारत में कई नीतिकार हुए हैं, जिन्होंने भारत के धर्म और राज्य को एक दिशा दी है। उन्हीं नीतिकारों में से एक प्रसिद्ध नीतिकार हैं शुक्राचार्य। ऋषि भृगु के पुत्र और दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की शुक्र नीति आज भी प्रासंगिक मानी जाती है। आज के संदर्भ में ...
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छुआछूत एक सर्वव्यापी और प्राचीनकालीन सत्य है, जिसका बाद में गलत अर्थ भी निकाला जाने लगा। वर्तमान की अपेक्षा प्राचीनकाल में चिकित्सा सुविधाएं इतनी नहीं थी।
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बहुत से लोग अपने घर की छत पर ध्वज लगाते हैं। यह ध्वज कई कारणों से लगाया जाता है। लेकिन ज्योतिष के अनुसार ध्वज लगाने का कुछ और ही कारण और लाभ है।
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मनुष्य जन्म लेता है तो उसकी मृत्यु तक कई तरह के ऋण, पाप, पुण्य उसका पीछा करते रहते हैं। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि तीन तरह के ऋण को चुकता कर देने से मनुष्य को बहुत से पापों और संकटों से छुटकारा मिल जाता है। कहीं कहीं चार तरह के ऋण बताए गए ...
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छुआछूत एक सर्वव्यापी और प्राचीनकालीन सत्य है, जिसका बाद में गलत अर्थ भी निकाला जाने लगा। वर्तमान की अपेक्षा प्राचीनकाल में चिकित्सा सुविधाएं इतनी नहीं थी। ऐसे में जब कोई बीमारी या महामारी फैलती थी तो लोग अपने अनुभव का उपयोग करते थे। इसी अनुभव के ...
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पांच तत्वों में से एक है जल। पुराणों में वर्णित है जल की महिमा का महत्व। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। आओ जानते हैं कि पुराणों में जल का क्या महत्व है।
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जीवन नियमों से चलता है और यदि नियम नहीं है तो सबकुछ अव्यवस्थित और अनिश्‍चित होगा। कई लोग हैं तो प्रतिदिन सुबह 7 बजे उठ ही जाते हैं और नित्यर्मों से मुक्ति तय समय पर पूजा-पाठ करके ही दूसरा कार्य करते हैं। यदि दिन की शुरुआत अच्छी रहती है तो संपूर्ण ...
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माता काली की पूजा या भक्ति करने वालों को माता सभी तरह से निर्भीक और सुखी बना देती हैं। वे अपने भक्तों को सभी तरह की परेशानियों से बचाती हैं। जिस प्रकार अग्नि के संपर्क में आने के पश्चात् पतंगा भस्म हो जाता है, उसी प्रकार काली देवी के संपर्क में आने ...
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हिन्दू धर्म में वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का बहुत ही महत्व माना गया है। बहुत से त्योहार तो वृक्ष से ही जुड़े हुए हैं जैसे वट सावित्री व्रत, आंवला नवमी, तुलसी पूजा, अश्वत्थोपनयन व्रत आदि कई ऐसे व्रत और त्योहार हैं जो पेड़ पौधों से जुड़े हुए हैं। आओ ...
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