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आपने ये 10 नियम अपना लिए तो शर्तिया आपको कभी गंभीर रोग नहीं होगा

बुधवार,नवंबर 25, 2020
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भारत में कई नीतिकार हुए हैं, जिन्होंने भारत के धर्म और राज्य को एक दिशा दी है। उन्हीं नीतिकारों में से एक प्रसिद्ध नीतिकार हैं शुक्राचार्य। ऋषि भृगु के पुत्र और दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की शुक्र नीति आज भी प्रासंगिक मानी जाती है। आज के संदर्भ में ...
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हिन्दू धर्म के प्रत्येक मांगलिक कार्य या पूजा आदि में पंच देव की पूजा का विधान है। इनके बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है। इन पंचदेवों की पूजा से ही सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। आओ जानते हैं कि कौन हैं पंच देव और कैसे होती है इनकी पूजा।
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छठ पूजा व व्रत का प्रारंभ हिन्दू माह कार्तिक माह के शुक्ल की चतुर्थी तिथि से होता है और षष्ठी तिथि को कठिन व्रत रखा जाता है तथा दूसरे दिन सप्तमी को इसका पारण होता है। दरअसल, छठ पूजा 4 दिनों तक चलने वाला पर्व है जिसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से ...
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कहते हैं कि जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन। जैसे होगा मन वैसे होगा विचार और भाव। जैसा होगा विचार और भाव वैसा ही होगा आपका व्यवहार और भविष्य। इसीलिए हिन्दू धर्म में भोजन के तीन प्रकार बताए गए हैं। सात्विक भोजन, राजसिक भोजन और तामसिक भोजन। यहां ...
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यदि आप प्रतिदिन घर या मंदिर में पूजा या प्रार्थना करते हैं तो आपको कुछ नियम भी पालने चाहिए। नियम है तो धर्म है और धर्म है तो ही जीवन है। अत: नियम से ही कोई कार्य करें तो उचित है। तो आओ जानते हैं कि पूजा से पहले ऐसा कौन सा कार्य है जो हमें करना जरूरी ...
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तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधे मिलते हैं- जैसे श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी आदि। आओ जानते हैं कि हिन्दू धर्म में क्या है तुसली का महत्व।
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प्रत्येक धर्म में धर्मग्रंथों का अत्यधिक महत्व होता है, और पवित्रता एवं सम्मान की दृष्टि से इन्हें पढ़ने के लिए समय और तरीका भी उतना ही महत्व रखता है। लेकिन धर्मग्रंथों को पढ़ने के लिए सुबह और शाम का समय ही सही माना जाता है। चलिए जानते हैं इसका ...
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भारतीय धर्म और संस्कृति में हाथी का बहुत ही महत्व है। हाथी को पूज्जनीय माना गया है। हाथी से जुड़े कई किस्से, कहानियां और पौराणिक कथाएं भारत में प्रचलित है। आओ जानते हैं कि हाथी क्यों है पूज्जनीय।
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प्राचीनकाल में संध्योपासना या संध्यावंदन की जाती थी। आगे चलकर यह पूजा, आरती और तरह तरह की पूजा विधियों में बदल गई। अब मोटे तौर पर कह सकते हैं कि संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- (1) प्रार्थना, (2) ध्यान-साधना, (3) भजन-कीर्तन (4) यज्ञ और (5) पूजा-आरती। ...
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ऋग्वेद में स्वस्तिक के देवता सवृन्त का उल्लेख है। स्वस्तिक का आविष्कार आर्यों ने किया और पूरे विश्‍व में यह फैल गया। भारतीय संस्कृति में इसे बहुत ही शुभ कल्याणकारी और मंगलकारी माना गया है। स्वस्तिक शब्द को 'सु' और 'अस्ति' दोनों से मिलकर बना है। 'सु' ...
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ज्योतिष की एक मान्यता अनुसार प्रथम भाव से खानदानी दोष देह पीड़ा, द्वितीय भाव आकाश देवी, तृतीय भाव अग्नि दोष, चतुर्थ भाव प्रेत दोष, पंचम भाव देवी-देवताओं का दोष, छठा भाव ग्रह दोष, सातवां भाव लक्ष्मी दोष, आठवां भाव नाग दोष, नवम भाव धर्म स्थान दोष, दशम ...
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हिंदू धर्म में जीवन की हर हरकत, कर्म, संस्कार, रीति-रिवाज, दिनचर्या, समाज, रिश्ते, देश, समय, स्थान आदि को नियम, अनुशासन और धर्म से बांधा है। कहना चाहिए कि नियम ही धर्म है। पर्याप्त नींद लेना क्यों जरूरी है और सोते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए ...
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कई घरों में नवरात्रि पर सप्तमी, अष्टमी या नवमी की पूजा होती है। पूजा के बाद हवन भी किया जाता है। हवन तो विधिवत रूप से पंडितजी ही करवाते हैं, लेकिन लॉकडाउन में आप खुद ही कैसे घर में हवन करें जानिए इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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कलश की स्थापना गृहप्रवेश, नवरात्रि पूजन, दीपावली पर लक्ष्मी पूजन, यज्ञ-अनुष्ठान और सभी तरह के मांगलिक कार्यों के शुभारंभ अवसर पर आदि के अवसर की जाती है। आओ जानते हैं इसकी पूजा घर में स्थापना करने के क्या है 3 फायदे।
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धूप कई प्रकार की होती है। तंत्रसार के अनुसार अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागरमाथा, चंदन, इलाइची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गुल ये सोलह प्रकार के धूप माने गए हैं। इसे षोडशांग धूप कहते हैं।
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शिव के मंदिर में सोमवार, विष्णु के मंदिर में रविवार, हनुमान के मंदिर में मंगलवार, शनि के मंदिर में शनिवार और दुर्गा के मंदिर में बुधवार और काली व लक्ष्मी के मंदिर में शुक्रवार को जाने का उल्लेख मिलता है। गुरुवार को गुरुओं का वार माना गया है। इस दिन ...
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व्रत रखने के नियम दुनिया को हिंदू धर्म की देन है। हिंदू धर्म में व्रत रखने के कई नियम है और इसका बहुत ही महत्व है। व्रत रखना एक पवित्र कर्म है और यदि इसे नियम पूर्वक नहीं किया जाता है तो न तो इसका कोई महत्व है और न ही लाभ अलबत्ता इससे नुकसान भी हो ...
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मंत्रयोग या जपयोग के चमत्कार के संबंध में शास्त्रों में ढेर सारे उल्ले‍ख मिलते हैं। वेदों में उल्लेख है कि विशेष प्रकार के मंत्रों से विशेष तरह की शक्ति उत्पन्न होती है। अनेक परिक्षणों से यह सिद्ध हो गया है कि मंत्रों में प्रयोग होने वाले शब्दों में ...
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हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है। परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान, स्थान विशेष या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी बाहिनी तरफ से घूमना। इसको 'प्रदक्षिणा करना' भी कहते हैं, जो षोडशोपचार पूजा का एक अंग है। प्रदक्षिणा की प्रथा ...
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