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चतुर्थी तिथि के 8 रहस्य, जानना है जरूरी

शनिवार,सितम्बर 19, 2020
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प्रत्येक माह में 2 चतुर्दशी और वर्ष में 24 चतुर्दशी होती है। चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने का बहुत महत्व माना गया है। आओ जानते हैं इस तिथि की 5 खास बातें।
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क्या पितृदोष से हमें डरना चाहिए? क्या पितृदोष एक भयानक दोष है? इन सभी का जवाब है नहीं। नहीं क्यों? इसके कई कारण है। यदि आपके कर्म अच्छे हैं तो आपको किसी से भी डरने की जरूरत नहीं। किसी भी प्रकार के दोष निवारण करने की जरूरत नहीं। परंतु यदि आप गलत ...
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बहुत से हिन्दुओं के घरों में शालिग्राम होता है। यह शिवलिंग से मिलता-लता एक पत्थर होता है जो कि नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गंडकी नदी के तट पर ही पाया जाता है। शिवलिंग शिवजी तो शालिग्राम भगवान विष्णु का विग्रह रूप है। यह बहुत जाग्रत होते हैं। मान्यता है ...
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केले का पेड़ काफी पवित्र माना जाता है और कई धार्मिक कार्यों में इसका प्रयोग किया जाता है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को केले का भोग लगाया जाता है। केले के पत्तों में प्रसाद बांटा जाता है। आओ जानते हैं केले की पूजा के 5 चमत्कारिक लाभ।
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भारतीय धर्म और संस्कृति में हाथी का बहुत ही महत्व है। हाथी को पूज्जनीय माना गया है। हाथी से जुड़े कई किस्से, कहानियां और पौराणिक कथाएं भारत में प्रचलित है। आओ जानते हैं कि हाथी क्यों है पूज्जनीय।
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धूप कई प्रकार की होती है। तंत्रसार के अनुसार अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागरमाथा, चंदन, इलाइची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गुल ये सोलह प्रकार के धूप माने गए हैं। इसे षोडशांग धूप कहते हैं।
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भारत में अगरबत्ती का प्रचलन प्राचीनकाल से ही जारी है। प्रारंभ में अगरबत्ती की जगह धूप का प्रचलन था। भारत से यह प्रचलन मध्य एशिया, तिब्बत, चीन और जापान में गया। आओ जानते हैं अगरबत्ती के 5 फायदे और 5 नुकसान।
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प्रत्येक धर्म में धर्मग्रंथों का अत्यधिक महत्व होता है, और पवित्रता एवं सम्मान की दृष्टि से इन्हें पढ़ने के लिए समय और तरीका भी उतना ही महत्व रखता है। लेकिन धर्मग्रंथों को पढ़ने के लिए सुबह और शाम का समय ही सही माना जाता है। चलिए जानते हैं इसका ...
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इस बार श्रावण मास की पूर्णिमा को सोमवार है और रक्षा बंधन के त्योहार के साथ ही श्रावणी उपाकर्म, पितृ तर्पण और ऋषि तर्पण करने का महत्व भी है। आओ जानते हैं श्रावणी उपाकर्म क्या है और क्या है इसका महत्व।
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तिलक लगाने की परंपरा भारतीय संस्कृति और धर्म में प्राचीन काल से ही रही है। किसी आयोजन में आने वाले व्यक्ति का स्वागत-सत्कार तिलक लगाकर ही करते हैं। विवाहित स्त्री अपने मस्तक पर कुंकुम का तिलक धारण करती है। शादी-विवाह या किसी मांगलिक कार्य में ...
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पांच तत्वों में से एक है जल। पुराणों में वर्णित है जल की महिमा का महत्व। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। आओ जानते हैं कि पुराणों में जल का क्या महत्व है।
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मंत्र कई प्रकार के होते हैं जिन्हें उचित समय और विधि से उच्चारण करने पर ही उनका लाभ मिलता है। मंत्र जप करने के भी कई कारण होते हैं। आखिर क्यों करते हैं मत्रोच्चार आओ जाते हैं इसके 10 कारण।
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घर या मंदिर में पूजा करने के लिए कुछ विशेष सामग्री का होना जरूरी है। उन सभी को मिलाकर ही पूजा की जाती है। हालांकि पूजा सामग्री तो बहुत सारी होती है, लेकिन यहां प्रस्तुत है पूजा के 20 प्रतीक वस्तुएं।
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हिन्दू धर्म में संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- 1. संध्यावंदन, 2.प्रार्थना, 3. ध्यान, 4. कीर्तन और 5. पूजा-आरती। व्यक्ति की जिसमें जैसी श्रद्धा है, वह वैसा करता है।
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हिन्दू माह के अनुसार नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। चार बार का अर्थ यह कि यह वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी ...
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी का व्रत करने के 5 लाभ।
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पांच तत्वों में से एक है जल। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। शुद्ध जल से जहां हम कई तरह के रोग से बच जाते हैं वहीं पवित्र जल से हमारा तन और मन निर्मल हो जाता है। जल को हिंदू धर्म में पवित्र करने वाला माना गया ...
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रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। जब कोई रंग बहुत फेड हो जाता है तो वह सफेद हो जाता है और जब कोई रंग बहुत डार्क हो जाता है तो वह काला पड़ जाता है। लाल रंग में अगर पीला मिला दिया जाए, तो वह केसरिया रंग बनता है। नीले में पीला मिल जाए, तब हरा रंग ...
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मंदिर या घर के पूजाघर में आपने देखा होगा गरुड़ घंटी को। मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। घंटी विशेष प्रकार का नाद होता है जो आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है।
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