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पूजा घर में रखें ये 20 पवित्र वस्तुएं, तभी होगा कल्याण

रविवार,जून 28, 2020
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हिन्दू धर्म में संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- 1. संध्यावंदन, 2.प्रार्थना, 3. ध्यान, 4. कीर्तन और 5. पूजा-आरती। व्यक्ति की जिसमें जैसी श्रद्धा है, वह वैसा करता है।
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हिन्दू माह के अनुसार नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। चार बार का अर्थ यह कि यह वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी ...
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी का व्रत करने के 5 लाभ।
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी के संबंध में 8 रहस्य।
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पांच तत्वों में से एक है जल। पुराणों में वर्णित है जल की महिमा का महत्व। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। आओ जानते हैं कि पुराणों में जल का क्या महत्व है।
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प्रत्येक धर्म में धर्मग्रंथों का अत्यधिक महत्व होता है, और पवित्रता एवं सम्मान की दृष्टि से इन्हें पढ़ने के लिए समय और तरीका भी उतना ही महत्व रखता है। लेकिन धर्मग्रंथों को पढ़ने के लिए सुबह और शाम का समय ही सही माना जाता है। चलिए जानते हैं इसका ...
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पांच तत्वों में से एक है जल। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। शुद्ध जल से जहां हम कई तरह के रोग से बच जाते हैं वहीं पवित्र जल से हमारा तन और मन निर्मल हो जाता है। जल को हिंदू धर्म में पवित्र करने वाला माना गया ...
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रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। जब कोई रंग बहुत फेड हो जाता है तो वह सफेद हो जाता है और जब कोई रंग बहुत डार्क हो जाता है तो वह काला पड़ जाता है। लाल रंग में अगर पीला मिला दिया जाए, तो वह केसरिया रंग बनता है। नीले में पीला मिल जाए, तब हरा रंग ...
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मंदिर या घर के पूजाघर में आपने देखा होगा गरुड़ घंटी को। मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। घंटी विशेष प्रकार का नाद होता है जो आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है।
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जीवन में कई तरह के संकट है तो उन संकटों का आध्यात्मिक समाधान भी है। प्रत्येक धर्मों में कुछ ऐसे दिव्य मंत्र और चमत्कारिक स्त्रोत के बारे में बताया गया है जिनके जप या पाठ से हम संकटों से बाहर निकल जाते हैं। हमें दैवीय सहायता प्राप्त होती है और हमारा ...
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हिंदू धर्म ग्रंथों में स्कंदपुराण को महापुराण कहा जाता है। पुराणों के क्रम में इसका तेरहवां स्थान है इसके खंडात्मक और संहितात्मक उपलब्ध दो रूपों में से प्रत्येक में 81 हजार श्लोक हैं। इस पुराण का नाम भगवान शंकर के बड़े पुत्र कार्तिकेय के नाम पर है। ...
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गरूड़ भगवान के बारे में सभी जानते होंगे। यह भगवान विष्णु का वाहन हैं। भगवान गरूड़ को विनायक, गरुत्मत्, तार्क्ष्य, वैनतेय, नागान्तक, विष्णुरथ, खगेश्वर, सुपर्ण और पन्नगाशन नाम से भी जाना जाता है। गरूड़ हिन्दू धर्म के साथ ही बौद्ध धर्म में भी ...
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गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वृक्षों में मैं पीपल हूं। हिन्दू धर्म में पीपल का बहुत धार्मिक महत्व है। आओ जानते हैं कि इसके 5 चमत्कारिक लाभ।
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प्राचीनकाल से ही लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हिन्दू शास्त्र और आयुरर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। मीठा खाने के संबंध में तो आपको पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे कि खाने के पहले तीखा या कहें कि चरका क्यों खाते हैं। आओ ...
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बिल्व अथवा बेल (बिल्ला) विश्व के कई हिस्सों में पाया जाने वाला वृक्ष है। हिन्दू धर्म में बिल्व के वृक्ष को बहुत ही पवित्र माना जाता है। इसके घर के आसपास होने के कई फायदे हैं लेकिन यदि यह गलत दिशा में लगा है तो नुकसान भी हो सकते हैं। आओ जानते हैं ...
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प्रत्येक माह में 2 चतुर्दशी और वर्ष में 24 चतुर्दशी होती है। चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने का बहुत महत्व माना गया है। आओ जानते हैं इस तिथि की 5 खास बातें।
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हिन्दू धर्म में किसी भी जीव की हत्या करने को ब्रह्म हत्या माना गया है। अलग अलग जीवों की हत्या करने का अलग अलग दोष लगता है और उसी के आधार पर नरक का निर्धारण होता है। इससे पहले उसके वर्तमान जीवन में उसे जो सजा भुगतना होती है वह अलग होती है।
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छुआछूत एक सर्वव्यापी और प्राचीनकालीन सत्य है, जिसका बाद में गलत अर्थ भी निकाला जाने लगा। वर्तमान की अपेक्षा प्राचीनकाल में चिकित्सा सुविधाएं इतनी नहीं थी। ऐसे में जब कोई बीमारी या महामारी फैलती थी तो लोग अपने अनुभव का उपयोग करते थे। इसी अनुभव के ...
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संध्यावंदन (पूजा, आरती, प्रार्थना, संध्योपासना, ध्यान, साधना, भजन कीर्तन आदि) के समय मंदिर या एकांत में शौच, आचमन, प्राणायामादि कर गायत्री छंद से निराकार ईश्वर की प्रार्थना की जाती है।
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