ईश्वर के बाद कौन...?

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कौन है हिंदुओं का ईशदूत, जानिए

एक साधे सब सधे सब साधे कोई न सधे

वेदों अनुसार ईश्वर को छोड़कर किसी अन्य की प्रार्थना नहीं करनी चाहिए। इससे जीवन में विरोधाभाष बढ़ता है और मन भटकाव के रास्ते पर चला जाता है। द्वंद्व रहित मन ही संकल्पवान बन सकता है। संपल्पवान मन में ही रोग, शोक और तमाम तरह की परिस्‍थितियों से लड़कर सफलता को पाने की शक्ति होती है।
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को कर्ता-धर्ता नहीं मानता। वह तो एक 'शुद्ध प्रकाश' है। उसकी उपस्थिति से ही निर्मित होते हैं और भस्म भी हो जाते हैं। ईश्वर को सर्वशक्तिमान घोषित करने के बाद हिंदुत्व कहता है कि ब्रह्मांड में तीन तरह की शक्तियां सक्रिय हैं- दैवीय, दानवी और मिश्रित शक्तियां। मिश्रित शक्तियों में गंधर्व, यक्ष, रक्ष, अप्सरा, पितृ, किन्नर, मानव आदि हैं।

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