परमाणु सिद्धांत के असली जनक तो ये हैं...

परमाणु और गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत के जनक आचार्य कणाद

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वैशेषिक दर्शन अनुसार व्यावहारिक तत्वों का विचार करने में संलग्न रहने पर भी स्थूल दृष्टि से सर्वथा व्यवहारत: समान रहने पर भी प्रत्येक वस्तु दूसरे से भिन्न है। वैशेषिक ने इसके परिचायक एकमात्र पदार्थ 'विशेष' पर बल दिया है इसलिए प्राचीन भारतीय दर्शन की इस धारा को 'वैशेषिक' दर्शन कहते हैं।

दूसरा यह कि प्रत्येक नित्य द्रव्य को परस्पर पृथक करने के लिए तथा प्रत्येक तत्व के वास्तविक स्वरूप को पृथक-पृथक जानने के लिए कणाद ने एक 'विशेष' नाम का पदार्थ माना है। 'द्वित्व', 'पाकजोत्पत्ति' एवं 'विभागज विभाग' इन 3 बातों में इनका अपना विशेष मत है जिसमें ये दृढ़ हैं। विशेष पदार्थ होने से ‍'विशेष' पर बल दिया गया इसलिए वैशेषिक कहलाए।
संदर्भ : ‍जीवन का यथार्थ और वर्तमान जगत (देवीप्रसाद मौर्य), भारतीय दर्शन के सूत्र (रामशरण शर्मा)


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