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प्रेम पर हिन्दी कविता : रूह के रिश्ते

गुरुवार,फ़रवरी 13, 2020
love poem
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तुम को हम दिल में बसा लेंगे, तुम आओ तो सही। सारी दुनिया से छुपा लेंगे, तुम आओ तो सही। एक वादा करो अब हमसे न बिछड़ोगे कभी नाज़ हम सारे उठा लेंगे, तुम आओ तो सही। बेवफ़ा भी हो सितमगर भी जफ़ा-पेशा भी हम ख़ुदा तुम को बना लेंगे, तुम आओ तो सही।
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मुझे हर उस लम्हे से प्यार है, जो तुमने जिया है। तुम अभी इस घड़ी, पल जहां हो, उस वक्त, उस जगह से मुझे प्यार है।
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प्रेम गीत : मचलती तमन्नाओं ने

शुक्रवार,दिसंबर 14, 2018
मचलती तमन्नाओं ने आजमाया भी होगा, बदलती रुत में ये अक्स शरमाया भी होगा
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बात मुद्दत से जो थी आंखों में आज लबों पे उतर आई है तू मेरे इश्क की इबारत है तू इसे पढ़ न पाई है
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मेरे आंसुओं से कहानी न पूछो वो तुमको भी आकर रुला जाएंगे झूठी कहानी और झूठा फसाना
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वो गया दफ़अतन कई बार मुझे छोड़के, पर लौटकर फिर मुझ में ही आता रहा। कुछ तो मजबूरियां थीं उसकी अपनी भी, पर चोरी-छिपे ही मोहब्बत निभाता रहा।
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नाराज़ हैं मेहरबाँ मेरे,अब आ भी जाओ,कि अंजुमन को तेरी दरक़ार है, ढूँढता रहा,
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है नहीं यकीन तुमको है, नहीं यकीन मुझको, फिर ये खत-दर-खत गुफ़्तगू क्या है।।1।।
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मैंने इश्क़ किया और बस आग से खेलता रहा' एक घड़ी जलता रहा, एक घड़ी बुझता रहा ।।1।।
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दर पे खड़ा मुलाकात को तुम आती भी नहीं, शायद मेरी आवाज़ तुम तक जाती भी नहीं।
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उम्र भर सवालों में उलझते रहे स्नेह के स्पर्श को तरसते रहे, फिर भी सुकूँ दे जाती हैं तन्हाईयाँ आख़िर किश्तों में हँसते रहे
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काश प्यार न किया होता बेपनाह, दिल लगा के लगता है कर दिया कोई गुनाह, दिन अब जलते हैं और रातें सुलगती हैं, किनारों से लड़ती लहरों में मुझे मेरी तड़प झलकती है।
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तेरी याद जीने नहीं देती दायित्वों का ख्याल मरने नहीं देता। जिस्म पर निशान हलके फुल्के लगते है, अंतरमन धूं धूं कर दहक रहा है।
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देख रही हूं कुछ गड़बड़ है, ये बेचैनी और ये हड़बड़ है!! मोहब्बत नई दिखे है जालिम, बोली में भी तेरे खड़खड़ है!!
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ओस की बूंद आकाश से गिरकर, फूलों और पत्तियों पर ठहर जाएगी। रातभर रोया है चांद किसी की याद में, यह कहानी धरा
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तुम्हे प्यार नहीं तो क्या मुझको दीवाना कह लो। उम्मीदे वफ़ा नहीं तो क्या, मुझको दीवाना कह लो।
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कविता : आ जाती हैं कुछ यादें

बुधवार,अप्रैल 18, 2018
धूल की पर्तों के नीचे तस्वीरों में अहसास जगाती हुई, ख़्वाहिशें कांधे पे लिए कुछ इठलाती हुईं, आ जाती हैं कुछ यादें दिल को बहकाती हुईं।
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क्या था तुम्हारी उस एक छुअन में, कि वो शाम याद आती है, तो जाती नहीं।अजब-सा खुमार था तुम्हारे सुरूर का,
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मैं हूं तेरा दीवाना, तू नहीं करीब मेरे, मैं तेरे आसपास हूं। तेरी तस्वीर को, ले के घूमता हूं...
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