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प्रेम कविता : उसकी याद फिर से आई है...

Updated: गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017 (16:17 IST)
उसकी याद फिर से आई है, 
दूर कहीं गूंज उठी शहनाई है।
 
रात रो-रोकर कटी है कहीं पर,
कहीं सुबह हो रही विदाई है।
 
किसी के अरमानों का गला गया घोंटा,
किसी के अरमान सजकर आए हैं।
 
जिंदगी किसी की बन गई कांटे,
फूल किसी की जिंदगी के मुस्कुराए हैं।
 
अश्क आंखों में भर आए किसी के,
हंसी ओठों पे किसी के आई है।
 
किसी की फूलों से सज गई अर्थी,
किसी के गजरों की खुशबू आई है।
 
रात अमावस की किसी की आई है,
किसी ने हाथों में मेहंदी रचाई है।
 
आंख रो-रोकर लाल हुई किसी की,
किसी के लबों पर हंसी आई है।
 
उसकी याद फिर से आई है,
दूर कहीं गूंज उठी शहनाई है। 
लेखक के बारे में
राकेशधर द्विवेदी

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