suvichar

प्रेम गीत : मुस्कराओ न...

Updated: सोमवार, 17 अक्टूबर 2016 (11:33 IST)
देखो न इतने प्यार से कहीं सब्र न छलक जाए,
मुस्कुराने की इस अदा पर कहीं प्यार न हो जाए।


 
बहुत जज़्ब किया खुद को तेरे सामने न आऊं,
कहीं तू देखकर मुझको गले से न लिपट जाए।
 
रात को चांद सरगोशियां किया करता है,
ऐसा न हो चांद कहीं तुझ में ही सिमट जाए।
 
घने दरख़्तों के नीचे तेरी गोद में मेरा सिर हो,
तू खिलखिलाकर हंसे और मुझसे लिपट जाए।
 
दिल ने बहुत चाहा कि तुझे अपना कह सकूं,
न ज़माने की इज़ाज़त थी न मुझसे ही कहा जाए।
 
 

लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

रोजाना अपनाएं ये 10 जादुई आदतें, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर और चेहरे पर आएगा गजब का ग्लो

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

अगला लेख