sawan somwar

Love Poem : तुम शीतल छांव हो

Updated: मंगलवार, 12 जनवरी 2021 (16:47 IST)
चाहे कितना भी तुम मना करो,
मान भी जाओ कि तुम मेरी हो।
तपते जीवन की धूपों में,
तुम शीतल छांव घनेरी हो।
 
सब रिश्तों से फुरसत,
मिल जाए तो।
आ जाना जल्दी से,
ऐसा न हो देरी हो।
 
रूह के रास्ते पर,
हम-तुम खड़े हुए।
अब न रुकना तुम,
चाहे रात अंधेरी हो।
 
देह तुम्हारी बंटी,
हुई है रिश्तों में।
कई जन्मों तक रूह,
सदा से मेरी हो।
 
अब इतना भी तुम,
मुझको न तरसाओ।
तुम मेरे प्यार की,
जीत सुनहरी हो।
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

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