मंगलवार, 23 अप्रैल 2024
  • Webdunia Deals
  1. धर्म-संसार
  2. धर्म-दर्शन
  3. धार्मिक स्थल
  4. Pandharpur Dindi Yatra
Written By

800 सालों से लगातार हो रही है पंढरपुर दिंडी यात्रा, भगवान विट्ठल की महापूजा देखने आते हैं लाखों भक्त

800 सालों से लगातार हो रही है पंढरपुर दिंडी यात्रा, भगवान विट्ठल की महापूजा देखने आते हैं लाखों भक्त - Pandharpur Dindi Yatra
महाराष्ट्र के पंढरपुर में स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यहां श्रीकृष्ण को विट्ठल और विठोबा कहते हैं। यह हिन्दू मंदिर विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर के रूप में जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष देवशयनी एकादशी के मौके पर पंढरपुर में लाखों लोग भगवान विट्ठल की महापूजा देखने के लिए पैदल यात्रा करके यहां आते हैं। पंढरपुर की यात्रा कार्तिक शुक्ल एकादशी को भी होती है। इस बार 10 जुलाई 2022 को देवशयनी एकादशी है।
 
आषाढ़ी एकादशी : आषाढ़ी एकादशी को देवशयनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन से देव 4 माह के लिए सो जाते हैं और वे फिर कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं।
 
पंढरपुर की दिंडी यात्रा : भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से पताका-डिंडी लेकर इस तीर्थस्थल पर लोग पैदल चलकर पहुंचते हैं। इस यात्रा क्रम में कुछ लोग अलंडि में जमा होते हैं और पुणे तथा जजूरी होते हुए पंढरपुर पहुंचते हैं। इनको ज्ञानदेव माउली की डिंडी के नाम से दिंडी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ये यात्राएं पिछले 800 सालों से लगातार आयोजित की जाती रही हैं। 
विट्ठलजी के दर्शन : महाराष्ट्र के पंढरपुर में स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यहां श्रीकृष्ण को विठोबा कहते हैं। पंढरपुर का विठोबा मंदिर पश्चिमी भारत के दक्षिणी महाराष्ट्र राज्य में भीमा नदी के तट पर शोलापुर नगर के पश्चिम में स्थित है। माना जाता है कि यहां स्थित पवित्र नदी चंद्रभागा में स्नान करने से भक्तों के सभी पापों को धोने की शक्ति होती है। भगवान विट्ठल को विट्ठोबा, पांडुरंग, पंढरिनाथ के नाम से भी जाना जाता है।
 
यहां विट्ठलजी के दर्शन के लिए लंबी कतार लगती है। सभी भक्तों को भगवान विठोबा की मूर्ति के पैर छूने की अनुमति है। इस मंदिर में महिलाओं और पिछड़े वर्गों के लोगों को पुजारी नियुक्त किया गया है। आषाढ़ी एकादशी पर महाराष्ट्र के कोने-कोने से वारकरी पालकियों और दिंडियों के साथ पंढरपुर में विट्ठल के दर्शन को पहुंचते हैं। दर्शन को उमड़ने वाले इस हुजूम की संख्या का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। पालकी के साथ एक मुख्य संत के मार्गदर्शन में समूह यानी दिंडी (कीर्तन/भजन मंडली) चलता है, जिसमें शामिल होते हैं वारकरी। एक दिंडी यानी 250-300 लोगों का परिवार, जो सालभर एक-दूसरे के संपर्क में रहता है। 
 
दर्शन समय : 06:00 am to 11:00 am, 11:15 am to 04:30 pm, 05:00 pm to 11:00 pm.
 
कैसे पहुंचे : 
1. पंढरपुर का विठोबा मंदिर पश्चिमी भारत के दक्षिणी महाराष्ट्र राज्य में भीमा नदी के तट पर शोलापुर नगर के पश्चिम में स्थित है।
 
2. यहां का सबसे करीबी एयरपोर्ट मुंबई और पुणे में है। पुणे से जेजूरी होते हुए शोलापुर और फिर पंढरपुर पहुंच सकते हैं।
 
3. महाराष्ट्र के कई शहरों से सड़क परिवहन के जरिए जुड़ा है पंढरपुर. इसके अलावा उत्तरी कर्नाटक और उत्तर-पश्चिम आंध्र प्रदेश से भी प्रतिदिन यहां के लिए बसें चलती हैं।
 
4 पंढरपुर में कुर्दुवादि रेलवे जंक्शन से जुड़ा हुआ है। कुर्दुवादि जंक्शन से होकर लातुर एक्सप्रेस (22108), मुंबई एक्सप्रेस (17032), हुसैनसागर एक्सप्रेस (12702), सिद्धेश्वर एक्सप्रेस (12116) समेत कई ट्रेन रोजाना मुंबई जाती हैं। पंढरपुर से भी पुणे के रास्ते मुंबई के लिए चलती है ट्रेन।
ये भी पढ़ें
सपने में कमल, हाथी और कलश सहित 10 चीजें हैं मां लक्ष्मी की कृपा के संकेत