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Amarnath yatra 2026: कैसे और कब प्रारंभ हुई अमरनाथ यात्रा?

वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
बुधवार, 29 अप्रैल 2026 (11:15 IST)
प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में अमरनाथ यात्रा का आयोजन होता है। दुर्गम क्षेत्र की यह यात्रा कश्मीर के पहलगाम और बालटाल से प्रारंभ होती है। प्राचीनाकल से ही इस यात्रा का आयोजन होता आया है। अमरनाथ यात्रा के प्रारंभ होने की कहानी पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोक मान्यताओं का एक दिलचस्प संगम है। इसके प्रारंभ को हम 3 मुख्य दृष्टिकोणों से समझ सकते हैं।
 

1. पौराणिक कथा: अमरकथा का रहस्य

अमरकथा: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य (अमरकथा) सुनाया था।
शुरुआत: जब पार्वती जी ने शिवजी से उनके अमर होने का रहस्य पूछा, तो शिवजी उन्हें एक एकांत स्थान पर ले जाना चाहते थे ताकि कोई और उस कथा को न सुन सके।
त्याग की यात्रा: यात्रा के दौरान उन्होंने पहलगाम में अपने बैल (नंदी) को, चंदनवाड़ी में चंद्रमा को, शेषनाग झील पर सांपों को और महागुणास पर्वत पर अपने पुत्र गणेश को छोड़ दिया।
अमर पक्षी: कथा सुनाते समय वहां मौजूद दो कबूतरों ने भी वह अमरकथा सुन ली और वे अमर हो गए। आज भी श्रद्धालुओं को वहां कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है।
 

2. भृगु ऋषि द्वारा खोज (प्राचीन मान्यता)

कश्यप ऋषि का राज्य कश्मीर: शास्त्रों के अनुसार, प्राचीन काल में कश्मीर की घाटी जलमग्न थी। कश्यप ऋषि ने जब नदियों के माध्यम से पानी निकाला, तब भृगु ऋषि हिमालय की यात्रा पर निकले। 
प्रथम यात्री भृगु ऋषि: माना जाता है कि जलस्तर कम होने पर सबसे पहले भृगु ऋषि ने ही इस पवित्र गुफा और हिम शिवलिंग के दर्शन किए थे। तब से ही ऋषि-मुनियों और भक्तों के लिए यह एक प्रमुख तीर्थ बन गया।
 

3. ऐतिहासिक साक्ष्य और 'बूटा मलिक' की कहानी

ऐतिहासिक उल्लेख: कल्हण की 'राजतरंगिणी' (12वीं शताब्दी) में 'अमरेश्वर' के नाम से इस तीर्थ का वर्णन मिलता है, जो सिद्ध करता है कि यह यात्रा हजारों साल पुरानी है। मुगल काल में 'आइन-ए-अकबरी' में भी इस गुफा का जिक्र मिलता है।
 
बूटा मलिक (15वीं/19वीं शताब्दी): कहा जाता है कि मध्यकाल में यह रास्ता लुप्त हो गया था। तब 'बूटा मलिक' नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक साधु ने कोयले से भरा बैग दिया। घर पहुँचने पर उसने देखा कि वह सोना बन गया है। जब वह साधु का धन्यवाद करने वापस पहुंचा, तो उसे वहां साधु नहीं बल्कि यह पवित्र गुफा मिली।
 

कब शुरू होती है यह यात्रा?

यात्रा तिथि : यह यात्रा प्रतिवर्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक चलती है। आमतौर पर यह समय जून के अंत या जुलाई की शुरुआत से लेकर अगस्त तक का होता है।
 
क्या आप जानते हैं? अमरनाथ का शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बर्फ के टपकने (Stalagmite) से बनता है, और आश्चर्य की बात यह है कि चंद्रमा की कलाओं (घटने-बढ़ने) के साथ इस शिवलिंग का आकार भी घटता और बढ़ता है।

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