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Environment day 2020 : जल, सूर्य, धरती, वृक्ष, हिन्दू परंपरा में इनकी महिमा जानकर दंग रह जाएंगे आप

गुरुवार,जून 4, 2020
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हे गजानन कहां हो तुम? तुम्हें जरा भी उसकी गुहार, दर्द, तड़प, पीड़ा दिखाई-सुनाई नहीं दी? हे देवों के देव वक्रतुंड, महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ।।।कितने निष्ठुर हो गए तुम भी? हे सुमुख, उस निर्दोष गर्भवती हथिनी मां के मुख में उन विश्वास घातियों ने जो आग ...
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भारतीय संस्कृति में 'वट सावित्री अमावस्या एवं पूर्णिमा' का व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। वट पूजा से जुड़े धार्मिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलू में 'वट' और 'सावित्री' दोनों का विशिष्ट महत्व माना गया है।
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नदी में सिक्के डालने की परंपरा सालों से चली आ रही है। आखिर हम नदी में सिक्का क्यों डालते हैं? आइए जानते हैं 10 अन्य हिन्दू परंपराएं....
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मंगलवार, 2 जून 2020 को निर्जला एकादशी है। इस दिन प्रातःकाल से लेकर दूसरे दिन द्वादशी की प्रातःकाल तक उपवास करने की अनुशंसा की गई है।
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शास्त्रों में निर्जला एकादशी को लेकर यह वर्णन मिलता है कि इस व्रत का महत्व महर्षि वेदव्यास जी ने भीम को बताया था। अतः इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
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आभूषणों ने मानव जाति व समाज में अपनी अलग और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चाहे वह सोना-चांदी हो, हीरे हों, रूबी, नीलम, पन्ना, मोती कोई भी रत्न या धातु हों। इनकी चकाचौंध ने हमेशा सभी को आकर्षित किया है। भारतीयों में तो यह प्रतिष्ठा का प्रश्न भी रहता
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गंगा स्नान से सारे पाप धुल जाते हैं, ऐसी लोगों की मान्यता रहती है। गंगा में लगाई गई एक डुबकी ही श्रद्धालुओं को क्षणभर में पवित्र कर देती है, इसमें रत्तीभर भी संदेह नहीं है।
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वराह पुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी बुधवारी में हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी स्वर्ग से अवतीर्ण हुई थी, वह दस पापों को नष्ट करती है।
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ना बीबी न भैया “सबसे बड़ा रुपइया” सभी ने सुना होगा। यह पैसा जो सिक्के में या नोटों में भले ही अलग-अलग आकार, रंग-रूप, वजन लिए हुए हो पर जिसकी जेब में ये बसते हैं वो ही इस दुनिया में सबसे रुतबेदार है। इसी के आस-पास सारी दुनिया घूमती है। फिर भी पैसा ...
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क्या दुर्लभ मनुष्य जन्म मिलना, यह भाग्य नहीं है? एक सुसंस्कृत देश की प्रजा के रूप में पहचाने जाना यह भाग्य नहीं है?
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संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
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हर साल ज्येष्ठ माह में नौतपा होता है। इस साल 25 मई से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के साथ ही नौतपा प्रारंभ हो जाएगा। इस वर्ष नौतपा 25 मई से 2 जून 2020 तक रहेगा।
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युद्ध के समय जब सेनाएं आमने-सामने खड़ी हो गईं ....तो अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए योगेश्वर श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया जो आज भी व्यवहारिक जीवन की समस्याओं के लिए समाधानकारक है।
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एक बार नारदजी वैकुण्ठ आए, तो उन्होंने देखा कि महाविष्णु चित्र बनाने में मग्न हैं .... विष्णु को उनकी ओर देखने का अवकाश नहीं।
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इन दिनों एक पोस्ट इधर से उधर घूम रही है कि महिलाएं आटा गूंथने के बाद उस पर उंगलियों से निशान क्यों बनाती हैं? इस पोस्ट का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है लेकिन आमजन इसे मानने में कोई बुराई भी नहीं समझ रहे हैं..आइए जानते हैं क्या कहती है यह पोस्ट...
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श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व के अनेक पहलू हैं। वे मां के सामने रूठने की लीलाएं करने वाले बालकृष्ण हैं, तो अर्जुन को गीता का ज्ञान देने वाले योगेश्वर कृष्ण। इस व्यक्तित्व का सर्वाधिक आकर्षक पहलू दूसरे के निर्णयों का सम्मान है। कृष्ण के मन में सबका सम्मान ...
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भगवान श्री कृष्ण हम सबको प्रिय हैं,आइए जानते हैं उन पर किसने क्या रचा है...
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ऋषि-मुनियों ने तो वेदों की मंत्र-शक्ति को कठोर योग व तपोबल से साधकर ऐसे अद्भुत कारनामों को अंजाम दिया कि बड़े-बड़े राजवंश व महाबली राजाओं को भी झुकना पड़ा। जानिए, ऐसे ही असाधारण या यूं कहें कि प्राचीन वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों द्वारा किए आविष्कार व उनके ...
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भगवन जो पाप गंगा में धोया जाता है वह पाप कहां जाता है ? भगवन ने कहा कि चलो गंगा से ही पूछते हैं- दोनों लोग गंगा के पास गए और कहा कि , हे गंगे ! सब लोग तुम्हारे यहां पाप धोते हैं तो इसका मतलब आप भी पापी हुई?
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