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चातुर्मास समाप्त, जानिए कब से शुरू होंगे शुभ मांगलिक कार्य

बुधवार,नवंबर 25, 2020
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ज्योतिष में राहु काल को अशुभ माना जाता है। अत: इस काल में शुभ कार्य नहीं किए जाते है। यहां आपके लिए प्रस्तुत है सप्ताह के दिनों पर आधारित राहुकाल का समय, जिसके देखकर आप अपना दैनिक कार्य कर सकते हैं।
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बुधवार, 25 नवंबर 2020 को देव प्रबोधिनी/देवउठनी एकादशी मनाई जा रही है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह एकादशी बहुत अधिक महत्व की मानी गई है। आइए जानें इस एकादशी की पौराणिक गाथा-
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देवउठनी एकादशी अत्यंत पवित्र तिथि है। इस दिन तन-मन-धन की पवित्रता को बनाए रखने के पूरे प्रयास करना चाहिए। यह तिथि इतनी शुभ है कि मन, कर्म और वचन की थोड़ी सी अशुद्धि भी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं कौन से 11 काम हैं, जो एकादशी ...
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कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी या हरि प्रबोधिनी एकादशी के दिन निम्न फूलों से श्रीहरि भगवान विष्णु का पूजन करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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भारतीय धर्म और दर्शन में पेड़, पौधों और प्रकृति के सभी तत्वों का मनुष्‍य के जीवन हेतु बहुत महत्व बताया गया है। हिन्दू दर्शन के अनुसार मनुष्य का जीवन प्रकृति से ही संचालिता होता है और इसे समझना जरूरी है। प्रकृति में ही रोग और शोक मिटाने की क्षमता ...
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कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन आंवला नवमी मनाई जाती है। इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल देने वाला होता है। अर्थात् उसके शुभ फल में कभी कमी नहीं आती।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। इस दिन आंवला पेड़ की पूजा-अर्चना कर दान पुण्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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वर्ष 2020 में आंवला नवमी 23 नवंबर को मनाई जा रही है। कार्तिक शुक्ल नवमी को अक्षय नवमी, आंवला नवमी या युगतिथि कहते हैं। यह तिथि युगों-युगों से अक्षय फलदायक मानी गई है। इसी दिन आंवले के वृक्ष की पूजा कर इसी वृक्ष की छाया में भोजन करने का विधान है।
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आज हम 'वेबदुनिया' के पाठकों को 'अबूझ' मुहूर्तों के विषय में जानकारी देंगे। इन मुहूर्तों की संख्या प्रतिवर्ष 'साढ़ेतीन' की होती है इसलिए इन्हें लोकाचार की भाषा में 'साढ़ेतीन' मुहूर्त भी कहा जाता है।
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विवाह के समय 'पाणिग्रहण' संस्कार के लग्न का निर्धारण बड़ी ही सावधानी से करना चाहिए। विवाह लग्न का निर्धारण करते समय कुछ बातों एवं ग्रह स्थितियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आज हम 'वेबदुनिया' के पाठकों को विवाह लग्न के निर्धारण से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण ...
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वर्तमान दौर में चरित्रवान बने रहना एक चुनौती नहीं है, परंतु कुछ लोग बनना ही नहीं चाहते हैं। उसका कारण है कि व्यक्ति आधुनिक दौर की चकाचौंध और अंधीदौड़ में शामिल होकर खुद को खो चुका है, जिसके चलते वह जीवन के हर मोर्चे पर खुद को असफल ही पाता है, कुछ ...
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दुनियाभर में और भी कृषि प्रधान देश हैं लेकिन वहां गाय को इतना पूजनीय नहीं माना जाता जितना की भारत में। इसके और भी कई कारण हैं। आओ जानते हैं गाय के धार्मिक पक्ष को।
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धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दिवाली के ठीक बाद आने वाली कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी पर्व के रूप में मनाया जाता है।
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कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक भगवान श्रीकृष्ण ने गौ, गोप और गोपियों की रक्षा के लिए अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था। आठवें दिन देवराज इन्द्र का अहंकार भंग हुआ और श्रीकृष्ण की शरण में आए तथा क्षमायाचना की। तब कामधेनु ने कृष्ण जी ...
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छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर ( तालाब ...
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चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ पूजा, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से जाना जाता है।
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देश की बहुत बड़ी आबादी इस पूजा की मौलिक बातों से अनजान है। इतना ही नहीं, जिन लोगों के घर में यह व्रत होता है, उनके मन में भी इसे लेकर कई सवाल उठते हैं। प्रस्तुत है षष्‍ठी पूजा के 16 बड़े सवाल और उनके सटीक जवाब...
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छठ पर्व के पीछे पौराणिक महत्व के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी छिपा हुआ है, जो कई लोग नहीं जानते। जी हां, छठ पर्व की परंपरा में बहुत ही गहरा विज्ञान छिपा हुआ है।
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इस महापर्व के लिए कई कड़े नियम तय किए गए हैं। इस पर्व के दौरान पूजन और विधि से जुड़ी कई मान्‍यताएं हैं।
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