अध्यात्म क्या है, जानिए

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-डॉ. रामकृष्ण सिंगी  एक दर्शन है, चिंतन-धारा है, विद्या है, हमारी संस्कृति की परंपरागत विरासत है, ऋषियों, मनीषियों के चिंतन का निचोड़ है, उपनिषदों का दिव्य प्रसाद है। आत्मा, परमात्मा, जीव, माया, जन्म-मृत्यु, पुनर्जन्म, सृजन-प्रलय की अबूझ पहेलियों को सुलझाने का प्रयत्न है अध्यात्म। यह अलग बात है कि इस प्रयत्न को अब तक कितनी सफलता मिल पाई है। अब तक निर्मित स्थापनाएं, धारणाएं, विश्वास, कल्पनाएं किस सीमा तक यथार्थ की परिधि को छू पाई हैं, यह प्रश्न अनुत्तरित है, पर इस दिशा में अनंत प्रयत्न अनेक उर्वर मस्तिष्कों द्वारा किए जाते रहे हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है।

> वेदों का रचनाकाल (जो अनुमानित 5000 वर्ष पूर्व का है) 'वैदिककाल' कहा जाता है। तब हमारा देश कृषि और पशुपालन युग में था। उस समय के निवासी कर्मठ, फक्कड़, प्रकृ‍तिप्रेमी, सरल और इस जीवन को भरपूर जीने की लालसा वाले थे। उन्होंने कुछ प्राकृतिक शक्तियों की पहचान की, जैसे मेघ, जल, अग्नि, वायु, सूर्य, उषा, संध्या आदि और स्वयं इनको या इन्हें संचालित करने वाले काल्पनिक आकारों (जैसे वरुण, इंद्र, रुद्र) को देवों के रूप में मान्यता दी। फिर इन्हें प्रसन्न रखने और इनके आक्रोश से उत्पन्न अनिष्ठ से अपने जीवन, अपनी फसलों, अपने पशुओं को बचाने के लिए इनके निमित्त अनुष्ठान किए जाने लगे। ये अनुष्ठान फिर अपनी कामना-पूर्ति और बीमारियों, शत्रु पर विजय पाने के तंत्र के रूप में विकसित हो गए। >



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