Hanuman Chalisa

भारतीय अध्यात्म के प्रतीक थे स्वामी विवेकानंद

Updated: शुक्रवार, 11 जनवरी 2019 (17:07 IST)
आधुनिक सदी में भारतीय अध्यात्म के प्रतीक एवं रामकृष्ण परमहंस के शिष्य रहे नरेंद्रनाथ दत्त का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ। वे कालांतर में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रख्यात हुए। 
 
नरेन्द्रनाथ ने 1879 में एंट्रेंस परीक्षा पास की और वे प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता से 1884 में बी.ए. हुए। उन्होंने कानून की पढ़ाई भी की थी, परंतु वे कानून की अंतिम वर्ष की परीक्षा में नहीं बैठ सके। पढ़ाई के दौरान ही नरेन्द्रनाथ की संपूर्ण आत्मिक ऊर्जा परब्रह्म की खोज की ओर मुखर हुई। वे ध्यान एवं समाधि में लीन रहने लगे। सत्य की खोज के दौरान ही वे महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर, केशवचंद्र सेन, शिवनाथ शास्त्री व समाज के अन्य मनीषियों के संपर्क में आए। समाज सुधार का उनके मन में विशिष्ट स्थान था। 
 
वे सती प्रथा के विरुद्ध और नारी शिक्षा के पक्षधर थे। 1822 में नरेंद्रनाथ रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आए और उनके सभी तार्किक-वैज्ञानिक आधारों की संतुष्टि के पश्चात वे विवेकानंद बने। 
 
दुनिया के इतिहास में यह बिरला ही उदाहरण है कि गुरु परमहंस ने उनके शिष्य को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर किया। उन्होंने तीन बार हरिद्वार की यात्राएं की और दिसंबर, 1892 में कन्याकुमारी पहुंचे, जहां एक शिला पर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। यह शिला 'विवेकानंद शिला' के नाम से जानी जाती है। 
मुंबई से वे 31 मई, 1893 में अमेरिका गए और हार्वर्ड के प्रोफेसर राइट के प्रयासों से वे शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन को संबोधित करने में सफल हुए। 
 
11 सितंबर, 1893 को स्वामी जी ने इस सभा को संबोधित किया और भारतीय अध्यात्म एवं राष्ट्रवाद के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में स्वीकारे गए। 
स्वामी के मतानुसार पूरब और पश्चिम की सभ्यताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। लंदन यात्रा के दौरान स्वामीजी ने मार्गरेट नोबेल का भगिनि निवेदिता के रूप में नामकरण संस्कार किया।
 
उनके ये अमूल्य विचार आज भी जीवन के लिए बहुउपयोगी है :- 
 
* 'उठो, जागो और तब तक न रुको, जब तक कि तुम लक्ष्य पर न पहुंच जाओ।'
 
ॐ 'कामनासागर की भांति अतृप्त है, ज्यों-ज्यों हम उसकी आवश्यकता पूरी करते हैं, त्यों-त्यों उसका कोलाहल बढ़ता है। जीवन का रहस्य भोग में नहीं है, पर अनुभव के द्वारा शिक्षा प्राप्ति में है।'
 
स्वामी विवेकानंद ने हमेशा वेदों के विश्वव्यापी मानवीय स्वरूप पर बल दिया और सभी धर्मों में व्याप्त एकत्व स्वरूप को मुखर किया।

ALSO READ: युगपुरुष स्वामी विवेकानंद को कभी विस्मृत नहीं कर सकता 'भारत का युवा'

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

जैन धर्म में क्या है चातुर्मास का महत्व?

26 July Birthday: आपको 26 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 26 जुलाई 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

विजया पार्वती व्रत के दिन क्या करते हैं क्या है इसका महत्व और कथा

Weekly Horoscope: 27 जुलाई से 2 अगस्त 2026 का साप्ताहिक राशिफल, जानें किस राशि के खुलेंगे भाग्य

अगला लेख