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शर्मसार स्टेचू ऑफ लिबर्टी? शर्मसार होते हम...

रविवार,जून 13, 2021
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जून का महीना कुछ लोगों के लिए बेहद खास महीना है या हम कह सकते हैं यह महीना एलजीबीटी के लिए खास होता है। हर साल जून माह को एक प्राइड मंथ के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। पूरे महीने जश्न का माहौल रहता है। धरती को इंद्रधनुष के रंगों से भर दिया जाता ...
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छोटे से गुड्डू को पार्क में खेलने जाना है, बिट्टू को गग्गा माता को रोटी,घास खिलाने, उसकी गर्दन में हाथ फेरने जाना है। छोटू को गली के नुक्कड़ पर जो उसकी जूली ‘तू-तू’ ने रूई के गोले से नर्म-नर्म बच्चे दिए थे उन्हें खिलाने और दूधू-रोटी देने जाना है। ...
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बदलते हुए इस भयावह दौर में हमने बात की इस देश की तरुणाई से.....और जाना उनसे कि कोविड काल में वे क्या सोच रहे हैं....क्या सीखा उन्होंने इस वक़्त से....हमने देखा कि इस विषम दौर ने इन युवाओं के भीतर संवेदनशीलता की एक नई परिभाषा रची है...उनके भीतर ...
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भाई जिनसे आप हर दिन लड़ते हैं लेकिन प्यार भी सबसे अधिक उन्हीं से करते हैं। भाई - बहनों के बीच बेशर्त प्यार होता है। भाई - बहन में जितनी लड़ाई होती है प्यार भी उतना ही होता है। मदर्स डे, फादर्स डे अन्य डे की तरह की आज ब्रदर्स डे हैं। यह हर साल 24 मई को ...
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अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस हर साल 15 मई को मनाया जाता है। हर साल विश्व परिवार दिवस की संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक थीम तैयार की जाती है। इस बार कोरोना काल को
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मृत्यु होते ही शत्रुता समाप्त हो जाती है। अब इसका विरोध करने का कोई आधार नहीं है जैसे यह तुम्हारा भाई था वैसे ही यह मेरा भी भाई था। अब इसका अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान, सम्मानपूर्वक करें। यही नहीं, मेघनाथ के शव पर श्री राम ने सम्मान पूर्वक अपना ...
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नीरज की कमउम्र पत्नी ऑक्सीजन के अभाव में दमतोड़ रही थी। नीरज के लिए वो समय साक्षात यमराज से युद्ध करने जैसा चल रहा था। जैसे तैसे उसे सिलिंडर मिला।कुछ मिनटों ही उसकी पत्नी और सांसें ले पाई।बड़ी देर हो चुकी थी। पर उसने तुरंत होश सम्हाला।आस-पास किसी को ...
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जैसे ही किसी की असामयिक मौत की खबर मिलती है कि जुट जाते हैं उनके और उनके संग अपने नए पुराने फोटो को ढूंढने। धड़ल्ले से कोलाज, वीडियो वो भी गीतों के साथ बनाते और शुरू हो जाते हैं सोशल मीडिया, अपने वाट्सअप के स्टेटस पर ‘सबसे पहले मैं..’ की धिक्कार दौड़ ...
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वे दोनों जीवन की उम्मीद छोड़ चुके थे कि उनके घर की घंटी बजी। कुछ लोग उनके दरवाजे पर थे। उनकी मदद करने। जिन्हें उनकी बहनों ने बड़ी मिन्नतें कर के भेजा था। इस सन्देश के साथ कि “चिंता न करें हमें आपकी किसी भी चीज में कोई रूचि या लगाव नहीं। हम तो यूंही ...
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जैसे ही फोन की घंटी बजती है लगता है कोई मनहूस खबर है। मानो फोन में यमराज अपने भैंसे के साथ विराजे हों जिसके गले में बंधी घंटी इस फोन में से सुनाई दे रही हो। समय ही ऐसा हो चला है। इस काल ने अपने पराये कुछ में स्वार्थ भर दिया, तो कुछ आज भी बिना विचलन ...
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पवन मित्तल और परिवार कोरोना से पीड़ित हुआ। इतने दिनों उन्होंने अपने फोन को अपने से दूर रखा।व्यवहारिक होने के कारण उनके चाहने वालों की संख्या भी बड़ी तादाद में है।वे सदैव सबकी मदद करने तत्पर रहा करते। पर फिर उन्होंने फोन क्यों बंद किया हुआ था बीमारी के ...
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उनको कोरोना ने आ घेरा। उनकी उम्र लगभग 63 वर्ष से ऊपर है। पर स्वभाव माखन सा है। छोटी बहन और बेटियों के साथ रहने और सुलझे विचारों की होने के कारण सदाबहार है हंसमुख और ममत्व से भरी। न केवल वे बल्कि उनकी छोटी बेटी, दोनों जंवाई, पति और नातिन भी चपेट में ...
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मेरी दोस्त का परिवार क्वारंटाइन में है, साथ ही उसका ब्लॉक सील कर दिया गया है। कोई बाहर आ-जा नहीं सकता। लेकिन बेटी के जन्मदिन पर मैंने अपनी सहेली के बेटे को बहुत मिस किया और अपने आपको केक देने से रोक नहीं पाई।' यह कहना है मनिता बंसल का, जो मुंबई के ...
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आधुनिक युग में मशीनों की संगत में लिंक का जबरदस्त महत्त्व है। पसंद की चीज ढूंढनी हो तो फलानी लिंक, किसी से जुड़ना हो तो ढीकानी लिंक। वैसे ही इस कोरोना नैराश्य को भगाना हो तो सकारात्मकता की लिंक। हताशा से जीतना हो तो परिवार के जीवन प्रेम व आत्मीयता की ...
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पूना में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करनेवाली स्नेहा का शुरू से सपना था, कि शादी के बाद वो सिर्फ पति के साथ रहे। दोनों कमाएं, खाएं,घूमें, मौज करें। परिवार में अन्य सदस्यों का बस मेहमानों की तरह हस्तक्षेप हो।
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उनकी लिखी किताब का विमोचन कार्यक्रम था। बचपन से उन्हें जानती हूं इसलिए जाना ही था। पारिवारिक संबंध रहे थे सो उनके भी परिजनों से बरसों बाद मिलने का उत्साह भी था। पर जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो ससुराल पक्ष से केवल उनके पति थे। बाकि कोई नहीं। बाद में पता ...
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पाकिस्तानी अभिनेता नोमान इजाज की मैं जबरदस्त प्रशंसक हूं। खासकर जब से सीरियल ‘डंक’देखना शुरू किया है, और सम्मान बढा है। कलाकारों के कद्रदान सरहदों की सीमा में बांधे नहीं जा सकते। सच्ची घटना पर आधारित ये ड्रामा झकझोर के रख देता है।
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फटी जींस से दिखने वाले घुटने पर टसुए बहाए गए... कुछ इस तरह से भी तो घुटने की आदतों पर कभी गौर किया है? इस घुटन ने दूसरों की जिंदगी भी नरक कर डाली है। बचा हुआ काम इस सोशल मीडिया ने पूरा कर दिया है। दोगले चरित्र को इसने भी उजागर किया है। कैसे-कैसे ...
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कई मामलों में माता-पिता अपनी बेटि‍यों की शादी करने के बाद सिर का बोझ उतर जाने वाले अहसास में होते हैं, लेकिन अगर वे थोड़ा सचेत हो जाएं तो उनकी बेटी के साथ होने वाली अनहोनी टल सकती है।
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