जब मायका हो आसपास

रिश्तों में दखलअंदाजी की शुरुआत

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एक ऐसा बंधन होता है, जो रिश्तों को नए पायदान पर ले जाता है। इस बंधन में बंधकर औरत की एक नई जिंदगी की शुरुआत होती है। जिसमें वह एक नए घर में नए रिश्तों के साथ प्रवेश करती है।

बेटी से बहू तक का सफर कहने को तो एक दिन का होता है परंतु उस एक दिन के बाद यह जन्म जन्मांतर के लिए जुड़ जाता है। शादी के बाद बेटी अपने घरवालों के लिए पराई हो जाती है। जिसका मायके आना-जाना किसी तीज-पर ही होता है।

एक ही शहर में जब बेटव मायका दोनों हो तो धीरे-धीरे रिश्तों में परिवर्तन आने लगता है। तीज-त्योहार पर मिलने वाली बेटी जब बार-बार मायके की दहलीज पर कदम रखती है तो उसके दोनों परिवारों में भविष्यगामी विवादों की शुरुआत हो जाती है।

ऐसे मामले अधिकांशत: उन परिवारों में अधिक प्रकाश में आते हैं, जिनमें बेटी का मायका व ससुराल एक ही शहर में होता है। वहाँ ससुराल में बहू के माँ-बाप की दखलअंदाजी व मायके में बेटी की दखलअंदाजी धीरे-धीरे रिश्तों में दरार पैदा कर देती है।

* बेटी है पराया धन :-
बेटी पराई अमानत होती है। शादी के बाद उसका ससुराल ही उसका घर होता है। उसके बाद मायका उसके लिए पराया घर हो जाता है। अब वह मायके में मेहमान की तरह आती-जाती है।

घर-परिवार में पारिवारिक परेशानियों की शुरुआत तब होती है, जब बेटी का ब्याह होता है और मायके नाजो-नखरे से पली बेटी बहू बनकर दूसरे घर में प्रवेश करती है।

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बेटी की हर आह पर तड़पने वाले माँ-बाप जब ससुराल में छोटी-छोटी बातों पर अपनी बेटी का पक्ष लेकर उसकी हिमायत करते हैं, तब रिश्तों में कड़वाहट की शुरुआत हो जाती है।

अधिकांश मामलों में जब बेटी का ससुराल नजदीक ही होता है। तब उसके मायके के रिश्तेदारों का बार-बार ससुराल में आकर धरना देना व पारिवारिक मामलों में दखलअंदाजी करना बेटी का बसा बसाया घर उजाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ता है।

यही स्थिति मायके की भी हो सकती है। जब एक ही शहर में रहने वाली बेटी अपने मायके में अपना आधिपत्य जताती है। तब वहाँ भी ननद-भाभी में विवादों के अंकुर फूटने लगते हैं।

* दूरियाँ बनाए रखें :-
रिश्तों में ज्यादा नजदीकियाँ भी अच्छी नहीं होती। हम भले ही दूर रहे पर एक-दूसरे के दुख-दर्द में साथ निभाए तो उसमें कोई बुराई नहीं है परंतु यदि हम हर रोज एक-दूसरे के संपर्क में रहकर उनकी पारिवारिक जिंदगी में दखलअंदाजी करें तो यह अच्छा नहीं है।

गायत्री शर्मा|
एक ही शहर में रहना कोई बुरी बात नहीं है परंतु रिश्तों में कुछ दूरियाँ बनाना बहुत जरूरी है, जिससे सभी के दिलों में एक-दूजे के प्रति व रिश्तों की मिठास हमेशा बनी रहे।



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