रामेश्वरम प्रतिष्ठा दिवस पर जानिए चार धाम में से एक हिंदू धाम की 5 रोचक बातें
तमिलनाडु के रामेश्वरम में रामेश्वरम प्रतिष्ठा दिवस मनाया जाता है। यह स्थान हिंदुओं के चार धामों मे से एक है। यहां पर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग स्थापित है जिसकी स्थापना भगवान श्रीराम ने की थी। चलिए जानते हैं रामेश्वरम प्रतिष्ठा दिवस के मौके पर इस धाम की 5 रोचक बातें।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व
शिव-राम की अद्भुत एकता: भगवान शिव के इस पावन ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका विजय पर प्रस्थान करने से पूर्व की थी। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (गंगा दशहरा) को हुए इस पावन अनुष्ठान को ही 'रामेश्वरम प्रतिष्ठा दिवस' के रूप में मनाया जाता है, जो सनातन संस्कृति की महानता का प्रतीक है।
चार धाम और ज्योतिर्लिंग का संगम: तमिलनाडु के तट पर स्थित रामेश्वरम न केवल हिंदुओं के पवित्र 'चार धामों' में से एक है, बल्कि यह देश के '12 ज्योतिर्लिंगों' में भी विशेष स्थान रखता है।
2. चमत्कारी जल और धार्मिक अनुष्ठान
महा-अभिषेक का पुण्य: प्रतिष्ठा दिवस के दिन यहाँ स्थापित शिवलिंग का गंगाजल और समुद्र के जल से अभिषेक करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस पावन त्रिवेणी से साधक के समस्त पापों का क्षय होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
समुद्र तट पर प्रथम स्नान (अग्नि तीर्थम): मंदिर के ठीक सामने विशाल समुद्र तट स्थित है। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु यहाँ समुद्र में डुबकी लगाने के बाद ही मंदिर के मुख्य दर्शन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत करते हैं।
3. मंदिर के भीतर स्थित दिव्य और औषधीय कुंड
22 पावन तीर्थम: रामनाथस्वामी मंदिर परिसर के भीतर 22 पवित्र कुंड (तीर्थम) स्थित हैं। इन कुंडों का जल औषधीय और दैवीय गुणों से भरपूर माना जाता है। मुख्य गर्भगृह में दर्शन से पहले श्रद्धालु इन सभी कुंडों के पानी से स्नान करते हैं।
खारे समंदर के बीच मीठे पानी का कुआँ: यहाँ हिंद महासागर के खारे पानी के बीचों-बीच एक चमत्कारी कुआँ स्थित है, जिसका पानी एकदम मीठा और पीने योग्य है। लोक मान्यता है कि इस कुएँ का निर्माण स्वयं भगवान राम ने अपने धनुष के एक तीर से किया था। वर्तमान में इसके संरक्षण की आवश्यकता के बावजूद, यहाँ आने वाले लाखों श्रद्धालु इस पानी को अत्यंत पवित्र मानकर श्रद्धा से पीते हैं और इससे स्नान करते हैं।
4. पितृ दोष निवारण और मोक्ष स्थली
पूर्वजों की मुक्ति का मार्ग: रामेश्वरम धाम को पितृ दोष की शांति और पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति (श्राद्ध व तर्पण) के लिए संपूर्ण भारत में सबसे उत्तम और फलदायी तीर्थ स्थलों में से एक माना गया है।
5. रामसेतु का गौरवशाली इतिहास
वानर सेना का मार्ग: इसी पावन भूमि से भगवान राम ने लंका तक पहुँचने के लिए पत्थरों के भव्य 'रामसेतु' का निर्माण करवाया था, जिसकी सहायता से वानर सेना लंका पहुँची थी। युद्ध समाप्ति के बाद, लंका के नए राजा विभीषण के अनुरोध पर श्रीराम ने 'धनुषकोटि' नामक स्थान पर इस सेतु को अपने धनुष से प्रतीकात्मक रूप से तोड़ दिया था।
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