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चौमू का अशोक बिहार जलसंकट से बदहाल, नल सूखे, 8 महीने में 21 बार खराब हुआ सरकारी बोरिंग

Updated: शनिवार, 13 जून 2026 (20:34 IST)
Chomu Water Crisis: सरकारें बदल गईं, मंत्री बदल गए, लेकिन जयपुर जिले चौमूं के अशोक विहार में पानी का संकट और जलदाय विभाग का 'घटिया' ढर्रा नहीं बदला। हद तो तब हो गई जब अशोक विहार कॉलोनी में लगा सरकारी बोरिंग पिछले 8 महीनों में रिकॉर्ड 21 बार खराब हो चुका है। अब इस बदहाली के खिलाफ अशोक विहार के निवासी रमेश कुमार रावत ने, जो वर्तमान में सिक्किम के गैंगटोक में कार्यरत हैं, वहीं से इस समस्या के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 
 
रावत ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर चौमूं एसडीएम आशीष शर्मा को एक विस्तृत ईमेल भेजा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रति सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, जलदाय मंत्री कन्हैयालाल, मुख्य सचिव वी. निवासन और JJM के एमडी आदि को भी भेजी गई है।

समस्या का परमानेंट इलाज नहीं!

जलदाय विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए स्थानीय निवासियों ने बताया कि एईएन सुनील कुमावत को फोन, व्हाट्सएप और लिखित में बार-बार शिकायतें दी गईं, लेकिन विभाग केवल 'लीपापोती' करने में जुटा है। बोरिंग के बार-बार ठप होने के पीछे बहानों की लंबी लिस्ट है- कभी बेरिंग का फ्यूज उड़ना, तो कभी तार जल जाना। कभी मोटर का फुंकना, तो कभी बिजली पोल से लाइट न मिलना। कभी इलेक्ट्रिसिटी बॉक्स की खराबी, तो कभी पाइपों का जवाब दे जाना। सवाल यह उठता है कि यह बोरिंग बार-बार क्यों दम तोड़ देता है। 

भ्रष्टाचार या लापरवाही?

विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो एक बार बोरिंग खराब होने पर सरकारी अमला, ठेकेदार, मजदूर और गाड़ी का अमला-जमला पहुंचता है। एक बार की मरम्मत का खर्च 2000 से 5000 रुपए तक बैठता है। चौमूं नगर में करीब 144 बोरिंग हैं। अगर यही गणित रहा तो सालभर में लाखों-करोड़ों रुपए सिर्फ मरम्मत के नाम पर बहा दिए जाते हैं।
 
यदि जलदाय विभाग मुस्तैदी और ईमानदारी से काम कर इसका स्थायी समाधान निकाले, तो जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपए बचेंगे, जिससे नए बोरिंग और पानी के अन्य संसाधन विकसित किए जा सकते हैं। बार-बार एक ही जगह मैनपॉवर लगाने से न तो कर्मचारियों की सैलरी का कोई आउटपुट निकल रहा है और न ही जनता को पानी मिल रहा है।

'बिना पानी' के बिल ले रहा विभाग

पीड़ित रमेश कुमार रावत ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके घर के नलों में पिछले कई सालों से पानी की एक बूंद तक नहीं आई है, लेकिन जलदाय विभाग हर महीने नियमित रूप से बिल वसूलने में जरा भी कोताही नहीं बरतता। इस भीषण गर्मी में पानी न मिलने से उन गरीब परिवारों का जीना मुहाल हो गया है जो इसी बोरिंग की सार्वजनिक टोंटी से बर्तन भरकर ले जाते हैं। यही नहीं, कॉलोनी के आराध्य देव शिवालय में विराजमान बाबा भोलेनाथ की सेवा-पूजा और साफ-सफाई के लिए भी बूंद-बूंद पानी को तरसना पड़ रहा है।

'मेरे पास पर्याप्त समय नहीं है...'

मामले में प्रशासनिक संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 11 जून 2026 को सुबह 9:33 बजे रमेश कुमार रावत ने चौमूं एसडीएम आशीष शर्मा को फोन कर समस्या बतानी चाही, तो एसडीएम साहब ने कहा कि मेरे पास पर्याप्त समय नहीं है, प्रतिदिन मेरे पास बहुत से कॉल आते हैं। यदि मैं एक-एक आदमी को 10-10 मिनट देने लग गया तो क्या होगा! हालांकि, बाद में एसडीएम ने समस्या का शॉर्ट मैसेज भेजने को कहा और 11 जून की शाम तक समाधान का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद, धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
 
अब देखना यह है कि जब शिकायत सीधे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की टेबल तक पहुंच चुकी है, तो चौमूं का यह 'बीमार' बोरिंग ठीक होता है या अफसरशाही और ठेकेदारों की जुगलबंदी यूं ही जनता के बजट को ठिकाने लगाती रहेगी।
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