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जुलाई माह में आएंगे कई शुभ तीज-त्योहार, व्रत-उपवास पर्व और दिवस

शनिवार,जुलाई 2, 2022
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भड़ली नवमी नवमी तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त है। इसके बाद देवशनी एकादशी के बाद सभी तरह के मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। आओ जानते हैं कि भड़ली नवमी कब है, क्या है इसका महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और विवाह बाधा दूर करने के 5 उपाय।
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Gupt Navratri 2022 इस वर्ष 30 जून 2022 से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है। इसे आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्षभर में कुल 4 नवरात्रि आती हैं, जो पौष, चैत्र, आषाढ और आश्विन माह में पड़ती है। Ashadha Gupt Navratri
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आषाढ़ माह की देवशयनी के बाद से चार माह के लिए व्रत और साधना का समय प्रारंभ हो जाता है जिसे चातुर्मास कहते हैं। सावन, भादो, आश्‍विन और कार्तिक। इन चार माह में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। आओ जानते हैं इसके 10 कारण।
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हलहारिणी अमावस्या (Halharini Amavasya) इस वर्ष 28 जून 2022, दिन मंगलवार को मनाई जा रही है। यह आषाढ़ माह की अमावस्या है, अत: इसे आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है। moon day in the month of Ashada
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Aashadh gupt navratri 2022: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 30 जून 2022, गुरुवार को प्रारंभ होगी जो 8 जुलाई तक चलेगी। गुप्त नवरात्रि में दश महाविद्याओं की पूजा और साधना होती है।
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ashadha month amavasya 2022 इस बार हलहारिणी अमावस्या 28 और 29 जून दोनों दिन मनाई जाएगी। मत-मतांतर के चलते मंगलवार को भौमवती अमावस्या तथा 29 जून को दान और श्राद्ध की अमावस्या मनाई जाएगी। यहां जानिए अमावस्या के खास उपां और महत्व- amavasya 2022
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हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन पितृ निवारण के लिए निम्न उपाय करने से जीवन के समस्त कष्‍ट दूर होते हैं।
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Ashadha amavasya: 14 जून 2022 से आषाढ़ माह का प्रारंभ हुआ था। आषाढ़ माह की अमावस्या 29 जून को है। इस अमावस्या का बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन के एक दिन पूर्व हलहारिणी भौमवती अमावस्या रहेगी। आओ जानते हैं इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और ...
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यहां पढ़ें मासिक शिवरात्रि व्रत की पौराणिक कथा। कैसे एक शिकारी ने दिन-रात भूखे रहकर, अनजाने में ही शिव जी के पूजन का पुण्यफल प्राप्त किया और प्राणियों पर दया दिखाकर इस व्रत को पूर्ण किया और उसका अच्छा फल भी पाया। आप भी पढ़ें मासिक शिवरात्रि व्रत की ...
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रवि प्रदोष व्रत की कथा, पूजा विधि मंत्र और 7 सरल तरीके शिव को प्रसन्न करने के
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Masik Shivratri 2022: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के अलावा हर माह मासिक शिवरात्रि आती है। प्रति माह कृष्‍ण पक्ष की जो चतुर्दशी होती है उसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। इस बार ...
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Ravi Pradosh: प्रत्येक माह में दो प्रदोष होते हैं। त्रयोदशी तिथि को प्रदोष कहते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। जो प्रदोष जिस वार को आता है उसे उस वार के नाम से जाना जाता है। हर प्रदोष का अलग ही महत्व होता है। ...
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Pradosh vrat june 2022 : हर माह में दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का प्रदोष। त्रयोदशी तिथि के दिन यह व्रत रखा जाता है। आओ जानते हैं अगला प्रदोष व्रत कब है, पूजा के मुहूर्त और विधि के साथ ही मंत्र और महत्व भी जानें।
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Ambuvachi Mela: कामाख्या देवी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में सबसे प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर देवी सती की योनि गिरी थी। कामाख्या देवी शक्तिपीठ असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में है। यह शक्तिपीठ ...
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Sankashti Chaturthi 2022 17 जून, शुक्रवार को कृष्णपिंगाक्ष संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन में विघ्नहर्ता श्री गणेश का पूजन करके पूरे व्रत किया जाता है और शाम को चंद्रोदय होने पर चंद्रमा का पूजा करके व्रत पूर्ण होता है। krishnapingaksha ...
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वर्ष 2022 में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 17 जून, शुक्रवार को पड़ रही है। आषाढ़ मास की इस चतुर्थी को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी (Krishnapingal Sankashti Chaturthi) कहते हैं।
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Ashadh Maas 2022 इस वर्ष 17 जून 2022, शुक्रवार के दिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) पड़ रही है। आषाढ़ मास की चतुर्थी व्रत की कथा-
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Ashadha Month Vrat Tyohar 15 जून 2022 से हिन्दी कैलेंडर का चौथा महीना आषाढ़ (Ashadha Month 2022) शुरू हो गया है। यह माह धार्मिक नजरिए से बहुत ही खास माना जाता है। इन दिनों वर्षा आरंभ हो जाती है। Ashadha 2022 Festivals List
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Gayatri puja mantra : मान्यता है कि माता गायत्री का प्राकट्य ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को हुआ था। इस बार गात्री जयंती 11 जून 2022 शनिवा रको मनाई जा रही है। ऋग्वेद की शुरुआत गायत्री मंत्र से ही होती है। आओ जानते हैं कि गायत्री मंत्र, पूजा की विधि, ...
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