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Parshuram Dwadashi: परशुराम द्वादशी क्यों मनाते हैं, जानिए इसका महत्व

Updated: सोमवार, 27 अप्रैल 2026 (16:54 IST)
Lord Parshuram: परशुराम द्वादशी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से भगवान परशुराम की उपासना के लिए मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार हैं, जिन्हें धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए पृथ्वी पर भेजा गया था। परशुराम द्वादशी का पर्व वैशाख मास की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे विशेष श्रद्धा के साथ धार्मिक रीति-रिवाजों और पूजा-पाठ के माध्यम से मनाया जाता है।ALSO READ: Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा?
 

आइए जानते हैं कि यह दिन क्यों मनाया जाता है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है:

 

क्यों मनाई जाती है परशुराम द्वादशी?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था, लेकिन परशुराम द्वादशी मुख्य रूप से उनके द्वारा किए गए धर्म की स्थापना और उनके तपस्वी रूप के सम्मान में मनाई जाती है।
 

इस दिन को मनाने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 
अधर्म का नाश: परशुराम जी ने पृथ्वी पर अहंकारी और अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं का अंत कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी। यह दिन उनकी उस शक्ति और न्याय का उत्सव है।
 
पितृ और गुरु भक्ति: परशुराम जी अपनी पितृ-भक्ति के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पिता महर्षि जमदग्नि की आज्ञा का पालन किया और कठोर तप से शिव जी को प्रसन्न किया। उनकी तपस्या की पूर्णता और उनके दिव्य स्वरूप की आराधना हेतु यह द्वादशी मनाई जाती है।
 

परशुराम द्वादशी का महत्व

हिंदू शास्त्रों में परशुराम द्वादशी का फल अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान परशुराम की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह दि समस्त पापों से मुक्ति से देकर मन की शुद्धि करता है।

परशुराम जी 'शस्त्र और शास्त्र' दोनों के ज्ञाता हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों में आत्मविश्वास बढ़ता है, भय का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। इस तरह यह साहस और निर्भयता की प्राप्ति का दिन है।

धार्मिक मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए इस दिन व्रत रखना विशेष फलदायी होता है। यह व्रत संतान और परिवार की रक्षा करके सुख-शांति और आरोग्य लाता है। चूंकि यह वैशाख मास में आती है, जो कि दान-पुण्य का महीना है, इस दिन किए गए दान, स्नान और तर्पण का फल कभी समाप्त नहीं होता यानी 'अक्षय' रहता है। यह दिन अक्षय पुण्य की प्राप्ति देता है।
 
परशुराम द्वादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। भगवान विष्णु या परशुराम जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले पुष्प, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, जल का घड़ा या कलश या सत्तू का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। भगवान परशुराम 'चिरंजीवी' हैं (अमर हैं), इसलिए उनकी पूजा हमें दीर्घायु और स्थिर बुद्धि का वरदान देती है।
 
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