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Last Updated : सोमवार, 27 अप्रैल 2026 (15:38 IST)

Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा?

The image depicts Jupiter and Earth, a meteorite, and Earth's rising temperature
भारतीय ज्योतिष और विज्ञान दोनों ही बृहस्पति (गुरु) को पृथ्वी के अस्तित्व के लिए अनिवार्य मानते हैं। जहाँ ज्योतिष इसे प्राणवायु, सुख और वातावरण की सौम्यता का कारक मानता है, वहीं विज्ञान इसे पृथ्वी की कक्षा को स्थिर रखने वाला 'कॉस्मिक रक्षक' और 'वैक्यूम क्लीनर' कहता है। ज्योतिष का मानना है कि वर्तमान में बृहस्पति की तेज गति से धरती के वातारवण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है। यह प्रभाव वर्ष 2033 तक रहेगा। इस दौरान धरती के जलवायु में अप्रत्याशित परिवर्तन होंगे।

पृथ्वी का अभेद्य कवच (कॉस्मिक रक्षक)

बृहस्पति अपनी विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति से पृथ्वी को अंतरिक्ष के खतरों से बचाता है:
उल्कापिंडों से सुरक्षा: यह खतरनाक एस्टेरॉयड और धूमकेतुओं को अपनी ओर खींचकर पृथ्वी से टकराने से रोकता है। इसके बिना पृथ्वी पर उल्कापात की घटनाएँ 1,000 गुना अधिक होतीं।
कक्षा की स्थिरता: यह सौरमंडल के द्रव्यमान केंद्र को संतुलित रखता है, जिससे पृथ्वी की कक्षा स्थिर रहती है और जीवन के अनुकूल मौसम बना रहता है।
 

अतिचारी बृहस्पति (2025-2026): बिगड़ती चाल और जलवायु संकट

18 मई 2025 से बृहस्पति 'अतिचारी' हो गए हैं। इसका अर्थ है कि वे अपनी सामान्य गति (एक राशि में 12 माह) को छोड़कर बहुत तेजी से राशियाँ बदल रहे हैं।
तीन गुना अतिचारी गोचर: वर्तमान में गुरु मिथुन में हैं। वे अक्टूबर 2025 में कर्क में जाएंगे, फिर दिसंबर में पुनः मिथुन में लौटेंगे और जून 2026 में फिर कर्क में प्रवेश करेंगे।
8 वर्षों का संकट: ग्रहों की यह अस्थिर चाल अगले 8 वर्षों तक जारी रह सकती है। यह ब्रह्मांडीय हलचल पृथ्वी के वातावरण की शांति और सौम्यता को बाधित करेगी।
पूर्व में भी हुए अतिचारी: बृहस्पति ग्रह पूर्व में भी कई बार अतिचारी हुए हैं लेकिन उस काल में धरती पर जंगल और पहाड़ों की भरमार थी। वर्तमान में मानव की गतिविधियों ने धरती को बहुत नुकसान पहुंचाया है जिसके चलते अतिचारी बृहस्पति का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

धरती पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव

बृहस्पति की इस बिगड़ती चाल के कारण वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं:
बढ़ता तापमान: अनुमान है कि आने वाले समय में भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में पारा 50°C के पार जा सकता है।
प्राकृतिक आपदाएँ: गुरु की 'अतिचारी' स्थिति से विनाशकारी बाढ़, समुद्री तूफान, भूकंप और भीषण जल संकट की आवृत्ति बढ़ेगी।
मिलनकोविच चक्र: बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की कक्षा को अधिक अंडाकार बना देता है, जिससे सूर्य की विकिरण मात्रा बदलती है और लंबे समय में हिमयुग या ग्लोबल वार्मिंग जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।

समाधान: हमारा साझा प्रयास

प्रकृति के इस प्रकोप को कम करने के लिए केवल वैज्ञानिक उपाय ही काफी नहीं हैं, हमें धरातल पर कार्य करना होगा:
वृक्षारोपण: बड़े पैमाने पर नए जंगल विकसित करना।
प्राकृतिक संरक्षण: खनन, पहाड़ों की कटाई और पेड़ों के विनाश पर तत्काल रोक लगाना।
संतुलित जीवन: वायुमंडल की शीतलता बनाए रखने के लिए प्रदूषण कम करना।
निष्कर्ष: बृहस्पति भले ही करोड़ों मील दूर है, लेकिन उसकी चाल हमारी 'प्राणवायु' और 'आयु' को सीधे प्रभावित करती है। यह समय सचेत होने और प्रकृति के साथ जुड़ने का है।
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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