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संकटों का अंत और सुखों का आरंभ: क्यों खास है चतुर्थी का उपवास?

Written By WD Feature Desk
Updated: सोमवार, 22 दिसंबर 2025 (18:44 IST)
What happens by fasting on Chaturthi: सनातन परंपरा में चतुर्थी तिथि का सीधा संबंध बुद्धि और विवेक के देवता भगवान श्री गणेश से है। यह केवल एक उपवास नहीं, बल्कि प्रथमपूज्य देव की कृपा पाने का एक आध्यात्मिक मार्ग है। महीने में दो बार आने वाली यह तिथि- कृष्ण पक्ष की 'संकष्टी' और शुक्ल पक्ष की 'विनायकी'- भक्तों के लिए वरदान का द्वार खोलती है। आइए समझते हैं कि इस व्रत को करने से साधक के जीवन में क्या परिवर्तन आते हैं।
 
शिव-शक्ति का मिलता है दिव्य आशीर्वाद गणेश जी महादेव और माता पार्वती के लाडले पुत्र हैं। जब कोई भक्त चतुर्थी का व्रत रखता है, तो वह न केवल गणेश जी को, बल्कि पूरे शिव परिवार को प्रसन्न करता है। इससे भक्त को माता पार्वती की ममता और भगवान शिव का संरक्षण प्राप्त होता है।
 
अंधकार का नाश और सकारात्मकता का वास आज के भागदौड़ भरे जीवन में नकारात्मकता जल्दी घर कर लेती है। चतुर्थी का पूजन घर और मन की अशांति को दूर करता है। श्री गणेश की आराधना से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और जीवन में मानसिक शांति व सकारात्मकता का संचार होता है।
 
दुखों की विदाई और धन-धान्य की प्राप्ति जो भक्त पूर्ण निष्ठा के साथ चतुर्थी का व्रत करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता और आर्थिक तंगी दूर होने लगती है। यह व्रत सुख-समृद्धि का कारक माना गया है, जिससे धन लाभ के योग बनते हैं और घर में बरकत आती है।
 
विघ्नहर्ता काटते हैं बाधाओं के जाल गणेश जी का एक नाम 'विघ्नहर्ता' है, जिसका अर्थ है दुखों को हरने वाला। चाहे नौकरी में अड़चनें हों, शिक्षा में बाधा या व्यापार का घाटा- चतुर्थी के दिन किया गया पूजन जीवन के समस्त अवरोधों को जड़ से खत्म कर देता है।
 
समस्याओं का समाधान और शुभता का आगमन यह व्रत व्यक्ति के धैर्य और संकल्प शक्ति को बढ़ाता है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति नियमित चतुर्थी व्रत का पालन करता है, उसकी जटिल से जटिल समस्याएं धीरे-धीरे सुलझने लगती हैं और उसे हर कार्य में 'शुभ-लाभ' की प्राप्ति होती है।

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