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वैशाख अमावस्या का क्या है महत्व, 5 उपायों से पितरों की होगी शांति

Updated: बुधवार, 15 अप्रैल 2026 (15:43 IST)
Vaishakh Amavasya significance: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। वर्ष 2026 में यह अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। वैशाख अमावस्या को सतुआ अमावस्या या सातुवाई/ सातुवाई अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस दिन को पितरों की तृप्ति, कालसर्प दोष से मुक्ति और दान-पुण्य के लिए अक्षय फलदायी माना गया है।ALSO READ: Vaishakh maas 2026: वैशाख मास प्रारंभ, जानें इस विशेष माह की 10 खास बातें
 

वैशाख अमावस्या का महत्व

पितृ तर्पण: मान्यता है कि वैशाख अमावस्या पर पितर पृथ्वी के निकट होते हैं। इस दिन किया गया तर्पण उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है।
 
गर्मी का दान: चूंकि इस समय भीषण गर्मी शुरू हो जाती है, इसलिए इस अमावस्या पर शीतल वस्तुओं के दान का विधान है, जो सीधे पितरों को तृप्ति पहुंचाता है।
 
कालसर्प दोष: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में राहु-केतु के कारण दोष है, उनके लिए इस दिन पूजा करना अत्यंत फलदायी है।
 

पितरों की शांति के लिए 5 अचूक उपाय

यदि आपके कार्यों में बाधा आ रही है या घर में अशांति रहती है, तो इस अमावस्या पर ये 5 उपाय जरूर करें:
 

1. सत्तू और जल का दान

वैशाख अमावस्या पर सत्तू, मिट्टी का घड़ा (मटका), पंखा और जल का दान करना सबसे उत्तम माना जाता है। पितरों के नाम से प्यासे को पानी पिलाने या राहगीरों को सत्तू खिलाने से पितृ दोष शांत होता है।
 

2. पीपल के वृक्ष की पूजा

पीपल में त्रिदेवों और पितरों का वास माना गया है। इस दिन सुबह पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध और काले तिल अर्पित करें। शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों से क्षमा प्रार्थना करें।
 

3. दक्षिण दिशा की ओर तर्पण

तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें गंगाजल, दूध, अक्षत और काले तिल मिलाएं। पितरों की दिशा अर्थात् दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए अंजलि से जल अर्पित करें। इससे अतृप्त आत्माओं को शांति मिलती है। इस तिथि पर गंगा, यमुना या किसी शुद्ध जलाशय में तर्पण करना लाभकारी है।ALSO READ: Vaishakh 2026: वैशाख माह के व्रत त्योहारों की लिस्ट
 

4. पंचबलि कर्म (भोजन दान)

अमावस्या के दिन घर में बने शुद्ध सात्विक भोजन का अंश पांच हिस्सों में निकालें: गाय, कुत्ता, कौआ, देवादि और चींटियों को भोजन कराएं। विशेष रूप से कौए को भोजन देना पितरों तक सीधे संदेश पहुंचाने जैसा माना जाता है।
 

5. चांदी के नाग-नागिन का पूजन

यदि कुंडली में कालसर्प या पितृ दोष भारी है, तो इस दिन चांदी के छोटे से नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करें और उन्हें किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या शिव मंदिर में अर्पित करें।
 

शांति के लिए विशेष मंत्र:

इस दिन इस मंत्र का जाप करने से पितृ प्रसन्न होते हैं:
 
'ॐ पितृभ्य: नम:' या 'ॐ अर्यमायै नम:' 
 
सावधानी: अमावस्या के दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से पूरी तरह परहेज करना चाहिए और घर में शांति का वातावरण बनाए रखना चाहिए।
 
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