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Paush Purnima Upay 2026: जनवरी, पौष पूर्णिमा पर करें ये 7 खास उपाय, हर कामना होगी पूरी

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 (16:54 IST)
Pausha Purnima: 3 जनवरी 2026, शनिवार को पौष पूर्णिमा का दिन बहुत ही खास है। इस दिन का धार्मिक महत्व विशेष रूप से गंगा स्नान, दान-पुण्य, और पूजा-अर्चना से जुड़ा हुआ है। इसे विशेष रूप से माघ मास की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है और यह दिन लोगों के लिए शुभकामनाओं, आशीर्वादों और कामनाओं की पूर्ति का दिन माना जाता है।ALSO READ: Paush Purnima 2026: पौष पूर्णिमा का व्रत क्यों रखते हैं, क्या है इसे रखने के फायदे?
 
पौष पूर्णिमा का दिन, साधना, दान, और पूजा से जुड़ा हुआ होता है, इसलिए इस दिन संयम और श्रद्धा के साथ इन उपायों को करना चाहिए। यदि आप किसी विशेष कार्य में सफलता की कामना कर रहे हैं, तो इस दिन विशेष रूप से गुण और सत्कर्म की ओर ध्यान दें। इस दिन विशेष रूप से सूर्य, शिव, और गंगा के प्रति श्रद्धा और आस्था से जीवन में शुभ बदलाव हो सकते हैं।
 
अत: इस दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो जीवन में सुख-समृद्धि और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। आइए जानें 7 खास उपाय जो आप पौष पूर्णिमा पर कर सकते हैं:ALSO READ: Magh Mela 2026: माघ मेले में जा रहे हैं तो जानिए क्या करें और क्या नहीं
 
1. गंगा स्नान करें:
 
पौष पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यदि गंगा नदी के पास जाना संभव नहीं हो तो शुद्ध जल में थोड़ी गंगाजल मिलाकर स्नान करें। यह उपाय पापों का नाश करने और पुण्य प्राप्ति के लिए है।
 
2. तिल और गुड़ का दान करें:
 
इस दिन तिल और गुड़ का दान करना बहुत पुण्यकारी होता है। इसे खासतौर पर गरीबों और ब्राह्मणों को दिया जाता है। यह उपाय समृद्धि और धन लाभ के लिए शुभ माना जाता है। दान करने से जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तिल और गुड़ का सेवन भी अपनी सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, साथ ही यह दान पवित्रता और शक्ति बढ़ाता है।
 
3. ध्यान और देवी-देवताओं की साधना:
 
इस दिन आप कुछ समय ध्यान या साधना में बिताकर मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। पौष पूर्णिमा के दिन साधना से आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा को बल मिलता है। यदि आप नियमित रूप से पूजा करते हैं तो इस दिन विशेष रूप से शिव, गणेश या मां लक्ष्मी की पूजा करें। इस खास दिन धन की देवी मां लक्ष्मी के पूजन से जीवन में धन आगमन होता है तथा धन में स्थायित्व बना रहता है। साथ ही ध्यान करने से मानसिक स्थिति संतुलित होती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।
 
4. शिव पूजा करें:
 
पौष पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। यदि संभव हो तो शिवलिंग पर पानी, दूध, और फल अर्पित करें। इसके बाद ॐ नमः शिवाय का मंत्र जप करें। यह उपाय व्यक्तिगत समस्याओं को दूर करने और शांति प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली होता है।
 
5. सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित करें:
 
इस दिन विशेष रूप से सूर्य नारायण को जल अर्घ्य अर्पित करने का विशेष महत्व है। एक पात्र में पानी लें और उसमें तिल डालें, फिर सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए जल सूर्यदेव को अर्पित करें। यह उपाय सूर्य देवता की कृपा प्राप्त करने और कर्म क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ है।
 
6. सत्यनारायण कथा और दीपदान:
 
पूर्णिमा की तिथि पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना अत्यंत फलदायी है। इस दिन घर में सत्यनारायण की कथा कराएं और शाम के समय मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे और घर के मंदिर में दीपदान करें। यदि संभव हो, तो किसी मंदिर या पवित्र नदी के किनारे भी दीप जलाएं। इससे जीवन का अंधकार या कष्ट दूर होते हैं।
 
7. पीपल के वृक्ष की पूजा:
 
पौष पूर्णिमा पर पीपल के पेड़ में देवताओं का वास माना जाता है। पूर्णिमा के दिन सुबह पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं। शाम को पीपल के नीचे घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है और पितृ दोष दूर होकर सुख-समृद्धि के लिए पितरों का आशीर्वाद मिलता है। 
 
पौष पूर्णिमा के दिन किए गए उपरोक्त उपायों से मिलेंगे ये अन्य लाभ: 
 
* समृद्धि और धन में वृद्धि।
* शांति और मानसिक संतुलन।
* पारिवारिक जीवन में सुख-शांति।
* स्वास्थ्य में सुधार।
* आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य लाभ।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: माघ मेला 2026: स्नान की तिथियां और कल्पवास का महत्व जानें

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