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माता हिंगलाज की पूजा कैसे करें? जानिए पूजन विधि, महत्व और मिलने वाले चमत्कारी फल

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 17 मार्च 2026 (08:47 IST)
आज 17 मार्च 2026 को हिंगलाज माता की पूजा का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। कई क्षेत्रों, विशेषकर सिंधी समुदाय, गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में, इस दिन को हिंगलाज माता के विशेष पूजन दिवस के रूप में मनाया जाता है। माता की पूजा करने से कई तरह के संकट दूर होते हैं।
 

1. शक्तिपीठ का महत्व

हिंगलाज माता सती के 51 शक्तिपीठों में से प्रथम मानी जाती हैं (माना जाता है कि यहाँ देवी का 'ब्रह्मरंध्र' यानी सिर का ऊपरी हिस्सा गिरा था)। चैत्र मास की चतुर्दशी को देवी की साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। आज के दिन भक्त माता से मानसिक शक्ति और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
 

2. वारुणी योग और कुलदेवी पूजन

आज के दिन बन रहे वारुणी योग के कारण तीर्थ स्नान और दान का फल अनंत होता है। हिंगलाज माता कई समुदायों की कुलदेवी हैं। परंपरा के अनुसार, वारुणी योग जैसे शुभ समय पर अपनी कुलदेवी का आह्वान करना परिवार में सुख-समृद्धि और सुरक्षा लाता है।
 

3. कष्ट निवारण और विजय

हिंगलाज माता को 'दुखों को हरने वाली' देवी माना जाता है। मान्यता है कि भगवान राम ने भी रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए हिंगलाज माता की यात्रा की थी। मंगलवार का दिन होने के कारण आज शक्ति की पूजा का प्रभाव और भी बढ़ जाता है, जो शत्रुओं पर विजय और भय से मुक्ति दिलाता है।
 

कैसे करें आज पूजा?

दीप दान: घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
लाल वस्त्र: माता को लाल रंग के वस्त्र या चुनरी अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।
मंत्र: "ॐ हिंगलाजायै नमः" का यथाशक्ति जाप करें।

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