Hanuman Chalisa

कब है कजली सतवा तीज, पूजा का शुभ मुहूर्त, क्या करते हैं इस दिन?

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 5 अगस्त 2025 (16:23 IST)
When is Kajri Teej 2025: 'कजली सतवा तीज' जिसे आमतौर पर कजरी तीज के नाम से जाना जाता है, यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व पति की लंबी उम्र, वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस साल, कजरी तीज 12 अगस्त 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी। इसे सातुड़ी तीज या बूढ़ी तीज भी कहते हैं।ALSO READ: वृंदावन में एक माह के लिए श्रीकृष्ण पूजा प्रारंभ, जन्माष्टमी तक रहेंगे ये 4 उत्सव
 
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण तृतीया तिथि का आरंभ 11 अगस्त को सुबह 10:33 बजे होगा और इसका समापन 12 अगस्त को सुबह 08:40 बजे होगा। चूंकि हिंदू धर्म में कोई भी व्रत उदया तिथि के अनुसार ही रखा जाता है, इसलिए कजरी तीज का पर्व 12 अगस्त को ही मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस पर्व के बारे में...
 
कजली तीज पूजा का शुभ मुहूर्त: 
तृतीया तिथि प्रारंभ- 11 अगस्त 2025 को 10:33 ए एम बजे
तृतीया तिथि समाप्त- 12 अगस्त 2025 को 08:40 ए एम बजे
 
इस दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:
 
• ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:49 से 05:34 बजे तक।
 
• अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:18 से 01:09 बजे तक।
 
• विजय मुहूर्त: दोपहर 02:52 से 03:43 बजे तक।
 
• गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:08 बजे से 07:30 बजे तक।
 
• निशिथ काल मुहूर्त: 12:21 ए एम, अगस्त 13 से 01:06 ए एम, अगस्त 13 तक।
 
• सर्वार्थ सिद्धि योग- 11:52 ए एम से 06:19 ए एम, अगस्त 13 तक।
 
भाद्रपद तीज के दिन क्या करते हैं? कजरी तीज का व्रत करवा चौथ की तरह ही बहुत कठिन होता है और इसे सुहागिन महिलाएं निर्जला रखती हैं। इस दिन किए जाने वाले मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
 
1. व्रत और पूजा: इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम को, वे सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कुछ जगहों पर नीमड़ी माता की पूजा भी की जाती है।
 
2. सत्तू और पकवान: इस व्रत में सत्तू का विशेष महत्व है, इसलिए इसे सातुड़ी तीज भी कहा जाता है। महिलाएं व्रत खोलने के लिए जौ, चना, चावल और गेहूं के सत्तू से बने पकवान और मिठाइयां बनाती हैं।
 
3. चंद्रमा को अर्घ्य: शाम को पूजा करने के बाद महिलाएं चंद्रमा के निकलने का इंतजार करती हैं। चांद निकलने पर उसे अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। अर्घ्य देने के बाद सत्तू, फल या मिठाई का सेवन किया जाता है।
 
4. झूला झूलना और कजरी/ कजली सतवा तीज के गीत : इस दिन महिलाएं घरों में झूले लगाती हैं और साथ में लोक गीत गाती हैं जिन्हें कजरी गीत कहा जाता है। यह परंपरा इस पर्व की खूबसूरती को और बढ़ा देती है।
 
5. गायों की पूजा: कुछ क्षेत्रों में इस दिन गायों की भी पूजा की जाती है और उन्हें हरी घास या रोटी खिलाई जाती है। गायों को धार्मिक रूप से बहुत पवित्र माना जाता है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: कैसे महाराज बन गया गांव से आया एक बालक, जानिए विवादों से नाता रखने वाले अनिरुद्धाचार्य की जन्म पत्री

लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 13 अगस्‍त 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

गणेश उत्सव 2026: कब होगी गणपति बप्पा की स्थापना? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

खग्रास सूर्य ग्रहण आज रात: कितने बजे लगेगा ग्रहण? जानें क्या करें और किन कामों से बचें

हरियाली तीज 2026: कब है व्रत? जानें पूजा विधि, महत्व, व्रत कथा और 5 खास उपाय

हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज में क्या अंतर? जानें तीनों व्रत का महत्व और पूजा विधि

अगला लेख