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Fri, 7 Aug 2026

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देवउठनी एकादशी : जानिए 8 विशेष बातें

देवउठनी एकादशी 2016
दिवाली के 11 दिन बाद देव प्रबोधिनी उत्सव और तुलसी विवाह का मंगल अवसर आता है। इसी को देवउठनी ग्यारस कहते हैं। एकादशी को यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है। देव प्रबोधिनी एकादशी का महत्व शास्त्रों में उल्लेखित है। एकादशी व्रत और कथा श्रवण से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

 
* क्षीरसागर में शयन कर रहे श्री हरि विष्णु को जगाकर उनसे मांगलिक कार्यों केे आरंभ करने की प्रार्थना की जाती है। 
 
* देवउठनी ग्यारस पर मंदिरों व घरों में भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा-अर्चना की जाती है। 
 
* मंडप में शालिग्राम की प्रतिमा एवं तुलसी का पौधा रखकर उनका विवाह कराया जाता है। 
 
* मंदिरों के व घरों में गन्नों के मंडप बनाकर श्रद्धालु भगवान लक्ष्मीनारायण का पूजन कर उन्हें बेर,चने की भाजी, आंवला सहित अन्य मौसमी फल व सब्जियों के साथ पकवान का भोग अर्पित किया जाता है।
 
* इसके बाद मण्डप की परिक्रमा करते हुए भगवान से कुंवारों के विवाह कराने और विवाहितों के गौना कराने की प्रार्थना की जाती है। 
 
* प्रबोधिनी एकादशी के दिन शालिग्राम, तुलसी व शंख का पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
 
* गोधूलि बेला में तुलसी विवाह करने का पुण्य लिया जाता है। 
 
* दीप मालिकाओं से घरों को रोशन किया जाता है और बच्चे पटाखे चलाकर खुशियां मनाते हैं।

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