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Purnima date 2026: अधिकमास की पूर्णिमा का व्रत रखने का क्या है महत्व, जानिए पूजा मुहूर्त और विधि

Updated: मंगलवार, 26 मई 2026 (15:24 IST)
Purushottam Maas Purnima 2026: हिंदू धर्म में अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलयमास भी कहा जाता है) की पूर्णिमा का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इस दौरान आने वाली पूर्णिमा का फल आम पूर्णिमा से कई गुना अधिक माना गया है। यह दिन पूरी तरह से भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास चल रहा है।ALSO READ: अधिक मास में बना दुर्लभ संयोग: ज्येष्ठ माह में 8 बड़े मंगल, जानें इसका खास महत्व
 
  • अधिकमास पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
  • अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व
  • पूजा की सरल और संपूर्ण विधि
  • इस दिन क्या दान करें?
  • ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा-FAQs
 

आइए जानते हैं इसके व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि:

 

अधिकमास पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी। व्रत और स्नान-दान के लिए तिथियां इस प्रकार हैं:
 
पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 30 मई 2026, शनिवार को सुबह 11:57 बजे से
 
पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02:14 बजे तक
 
महत्वपूर्ण नोट: पूर्णिमा व्रत और चंद्र पूजा: 30 मई 2026 (शनिवार) को रखी जाएगी, क्योंकि इस रात को पूर्णिमा का चंद्रमा मौजूद रहेगा
(चंद्रोदय का समय शाम 07:36 बजे है)।
 
पूर्णिमा स्नान-दान: 31 मई 2026 (रविवार) को करना शास्त्र सम्मत और उत्तम माना जाएगा, क्योंकि इस दिन उदयातिथि में पूर्णिमा है।
 

अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व

सर्वसिद्धिदायिनी तिथि: स्कंदपुराण और पद्मपुराण के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा को 'सर्वसिद्धिदायिनी' माना गया है। इस दिन किए गए जप, तप और दान का पुण्य कभी खत्म नहीं होता।
 
श्रीहरि और महालक्ष्मी की कृपा: अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु/ पुरुषोत्तम हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और धन-धान्य की कमी नहीं होती।
 
मानसिक शांति और चंद्र दोष से मुक्ति: पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से कुंडली का चंद्र दोष दूर होता है और मानसिक तनाव से राहत मिलती है।ALSO READ: पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?
 

पूजा की सरल और संपूर्ण विधि

अधिकमास पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के 'सत्यनारायण' रूप की पूजा का विशेष विधान है। आप इस विधि से पूजा कर सकते हैं:
 
सुबह का स्नान: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
 
व्रत का संकल्प: स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण कर सूर्य देव को जल अर्पित करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
 
भगवान विष्णु-लक्ष्मी की स्थापना: घर के मंदिर या एक चौकी पर पीला/लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
 
पूजन सामग्री: भगवान को पीले फूल, पीले फल, चंदन, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) बेहद प्रिय हैं, इसलिए भोग में इसे जरूर शामिल करें।
 
पाठ और कथा: इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या पढ़ें। साथ ही 'विष्णु सहस्रनाम' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।
 
शाम की पूजा (चंद्र अर्घ्य): शाम के समय चंद्रमा निकलने पर कच्चे दूध में गंगाजल और मिश्री मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें। इससे मन शांत और एकाग्र होता है।
 

इस दिन क्या दान करें?

ज्येष्ठ का महीना होने के कारण गर्मी बहुत होती है, इसलिए अधिकमास की पूर्णिमा पर जल से भरी मटकी (घड़ा), सत्तू, आम, खरबूजा, पंखा, वस्त्र या अन्न का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर दें।
 

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा-FAQs

प्रश्न: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा कब मनाई जाएगी?
उत्तर: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 30 मई को सुबह 11:57 बजे से होगा और समापन 31 मई को दोपहर 2:14 बजे पर होगा।
 
प्रश्न: अधिक पूर्णिमा को पुरुषोत्तम पूर्णिमा क्यों कहा जाता है?
उत्तर: जब पूर्णिमा पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में आती है, तब उसे पुरुषोत्तम पूर्णिमा कहा जाता है। यह संयोग लगभग तीन वर्ष में एक बार बनता है।
 
प्रश्न: अधिक पूर्णिमा पर किस भगवान की पूजा की जाती है?
उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
 
प्रश्न: क्या अधिक पूर्णिमा पर व्रत रखना चाहिए?
उत्तर: हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक पूर्णिमा का व्रत रखने से मानसिक शांति, सुख-सौभाग्य और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
 
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