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आंवला नवमी पर पढ़ें पौराणिक कथा...

Updated: रविवार, 29 अक्टूबर 2017 (12:35 IST)
आंवला पूजा के महत्व के विषय में प्रचलित कथा के अनुसार एक युग में किसी वैश्य की पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो रही थी। अपनी पड़ोसन के कहे अनुसार उसने एक बच्चे की बलि भैरव देव को दे दी। इसका फल उसे उल्टा मिला। महिला कुष्ठ की रोगी हो गई। इसका वह पश्चाताप करने लगी और रोग मुक्त होने के लिए गंगा की शरण में गई।
 
तब गंगा ने उसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला के वृक्ष की पूजा कर आंवले के सेवन करने की सलाह दी थी। जिस पर महिला ने गंगा के बताए अनुसार इस तिथि को आंवला की पूजा कर आंवला ग्रहण किया था, और वह रोगमुक्त हो गई थी।
 
इस व्रत व पूजन के प्रभाव से कुछ दिनों बाद उसे दिव्य शरीर व पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और उसके सभी दुख दूर हो गए। तभी से हिंदुओं में इस व्रत को करने का प्रचलन बढ़ा। तब से लेकर आज तक यह परंपरा चली आ रही है।

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