पदक का रंग बदल बदलकर सुशील खुश

लंदन| वार्ता| पुनः संशोधित रविवार, 12 अगस्त 2012 (23:55 IST)
WD
में कुश्ती के 66 किग्राग्राम भार वर्ग में जीतने वाले भारतीय पहलवान ने कहा कि उन्हें खुशी है कि वह इस बार अपने पदक का रंग बदल सके।

लगातार दो ओलिंपिक में पदक जीतकर इतिहास रचने वाले सुशील ने यहां संवाददाताओं से कहा फाइनल में जापानी पहलवान के खिलाफ मैंने अपनी पूरी कोशिश की थी। मैंने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। सुशील ने कहा ओलिंपिक स पहले मैंने कहा था कि इस बार मुझे पदक का रंग बदलना है और मुझे खुशी है मैं यह करने में कामयाब रहा।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय गुरु महाबली सतपाल, अपने माता-पिता, कोचों और फेडरेशन को देते हुए कहा कि मेरे साथ देशवासियों का आशीर्वाद और प्यार था जिससे मैं कामयाब रहा। मेरी ट्रेनिंग अच्छी रही थी और मुझे पदक जीतने का पूरा भरोसा था।
अगला ओलिंपिक खेलने के बारे में पूछने पर 29 वर्षीय सुशील ने कहा काफी खिलाड़ी शादी के बाद भी खेलते हैं। मैंने भी शादी के बाद पदक जीता। अभी मेरे पास समय है। उम्र मेरे साथ है और मैं कोशिश करता रहूंगा। फाइनल से पहले डिहाइड्रेशन की परेशानी पर सुशील ने कहा कि तकलीफें तो खेल का हिस्सा है।

सुशील खिताबी मुकाबले से पहले 'डिहाइड्रेशन' के शिकार हो गए थे, जिसके कारण वह जापान के तात्सुहिरो योनेमित्सु के खिलाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके।
सुशील फाइनल में दोनों राउंड गंवा बैठे। सुशील ने कहा मैं स्वास्थ्य को लेकर कोई बहाना नहीं बनाना चाहता। चोटें तो खेल का हिस्सा है। सुशील ने कहा मैं स्टेडियम में राष्ट्र धुन सुनना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने साथ ही कहा कि भारतीय कुश्ती के सुनहरे दिन लौट आए हैं।

भारतीय पहलवान को पहले राउंड में बाय मिला था और वह फिर तीन मुकाबले जीतकर फाइनल में पहुंचे थे। सुशील का सेमीफाइनल में कजाकिस्तान के अकझुरेक तानातारोव के साथ तीन राउंड का मुकाबला संघर्षपूर्ण रहा था जिसका उन पर काफी असर पड़ा। (वार्ता)



और भी पढ़ें :