sawan somwar

प्रवासी कविता : मेरी भारत माता

Updated: गुरुवार, 4 अगस्त 2022 (17:43 IST)
याद तो बहुत आती है 
आंखें भी भर जाती हैं 
 
दूर हूं तुझसे इतनी कि तेरी
सीमा भी नजर न आती है
 
तू तो रही है सदा से आरजू मेरी 
मेरी भारत माता 
तू तो बसी है मेरे मन में पर 
क्या करूं यहां से तुझे न देखा जाता
 
वो मेरा प्यारा सा गगनचुंबी हिमालय 
वो बहती गंगा की धारा
वो विशाल पूरब के मंदिर 
वो पश्चिम का द्वारा
 
वो दक्षिण में रामेश्वरम् और 
वो उत्तर का प्यारा सा नजारा 
जिसे देख खिल जाती मन की बगिया 
ऐसा है तिरंगा प्यारा हमारा
 
तुझे सताने को दुश्मन रहते सदा तैनात 
करते वार पहला वो हरदम 
पर खाते हैं हरदम जोरों की मात 
क्योंकि हम सब एक हैं तू है हमारा हिन्दुस्तान
 
तू है हम सबकी जान और शान 
कभी आए गोरे, कभी आए आतंकवादी
कभी सताया मंदिरों में जाकर तो कभी की गेटवे ऑफ इंडिया में बर्बादी
फिर भी न पा सके वो हमको क्योंकि हम सब एक हैं भारतवासी।

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
लेखक के बारे में
पुष्पा परजिया

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

इंदौर में साहित्य की विविध विधाओं का संगम: जनवादी लेखक संघ का 150वाँ रचना पाठ संपन्न

इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

अगला लेख