Daily Horoscope
✕

ग्रीष्म ऋतु पर कविता (भाग 2)

Updated: रविवार, 29 मई 2022 (18:06 IST)
- हरनारायण शुक्ला, मिनियापोलिस, USA
 
ज्येष्ठ का महीना, 
सूर्य का भभकना,
जलाशयों का सूखना, 
जल जंतुओं का तड़पना।
 
सूखते कीचड़ में, 
पड़ती दरारें,
एहसास कर लो, 
जमीं की अपनी कराहें।
 
पशु-पक्षी, 
जल की खोज में थके हारे, 
जीवित हैं, 
दूर झिलमिलाती मृगतृष्णा के सहारे। 
 
लू की लहर, कहर ढा रही है,
वह क्रूरता से सीटी बजा रही है,
दरवाजे खिड़कियां हैं सब बंद,
लोग अपने ही घरों में नजरबंद।
 
शाम हो चली है चलो,
छत पर पानी छिड़क लो,
नर्म सा बिस्तर बिछा लो,
तारे गिनते निद्रा में लीन हो लो।
 
(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

ALSO READ: ग्रीष्म ऋतु पर कविता (भाग 1)

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

कब मनाया जाएगा आचार्य विद्यासागर का जन्‍मोत्‍सव, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें...

कौन थे महर्षि वाल्मीकि? कब मनाई जाएगी उनकी जयंती? जानिए उनके बारे में रोचक बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा है भारत

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

रूस दे रहा है नाटो को परमाणु हथियारों की धमकी, NATO कमांड केन्द्रों पर हो सकते हैं हमले

अगला लेख