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Maha Gauri Story : नवरात्रि की आठवीं देवी हैं महागौरी, पढ़ें पावन कथा

मंगलवार,मार्च 31, 2020
Mahagauri story
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चैत्र नवरात्रि में महा अष्टमी के दिन महागौरी का पूजन किया जाता है। इस दिन अगर आप अपनी राशिनुसार आसन पर बैठकर मां की आराधना करेंगे तो मिलेगा मनचाहा फल। आइए जानें...
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नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान अष्टमी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है। सुंदर, अति गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है।
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नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान अष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है। सुंदर, अति गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। आइए पढ़ें मां महागौरी की आरती-
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नवरात्रि की सप्तमी तिथि को माता का कालरात्रि रूप का पूजन किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है-
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कई घरों में नवरात्रि पर सप्तमी, अष्टमी या नवमी की पूजा होती है। पूजा के बाद हवन भी किया जाता है। हवन तो विधिवत रूप से पंडितजी ही करवाते हैं, लेकिन लॉकडाउन में आप खुद ही कैसे घर में हवन करें जानिए इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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नवरात्रि के सातवे दिन यानी सप्तमी तिथि को माता कालरात्रि का पूजन किया जाता है। आइए पढ़ें माता कालरात्रि की आरती-
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मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के तीन नेत्र हैं। ये तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं।
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चैत्र माह की शुक्ल अष्टमी अर्थात 1 अप्रैल 2020 को तारा अष्टमी है। दस महाविद्याओं में से द्वितीय महाविद्या तारा हैं। ये शक्ति की स्वरूप हैं। नवरात्रि पर अष्टमी के दिन मां तारा की पूजा की जाती है। कुछ लोग नवमी को महातारा की साधना करते हैं।
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'ॐ रामचंद्राय नम:' क्लेश दूर करने के लिए प्रभावी मंत्र है। नवरात्रि में रामनवमी तक रामचरित मानस, वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड आदि के अनुष्ठान की परंपरा रही है। मंत्रों का जाप भी किया जाता है।
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मां कात्यायनी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की।
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मां दुर्गा की छठी विभूति हैं मां कात्यायनी। मां कात्यायनी की साधना का समय गोधूली काल है। इस समय में धूप, दीप, गुग्गुल से मां की पूजा करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
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नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी को पूजा जाता है। यह देवी भक्तों के रोग, शोक, संताप और भय नष्ट करती हैं। आइए पढ़ें आरती-
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भगवान श्रीकृष्ण को हर समय एक देवी साथ देती थी। महाभारत के युद्ध के पूर्व भी श्रीकृष्ण ने माता की पूजा की थी। आओ जानते हैं कि वे कौनसी देवी थी।
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नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम दिया गया है। भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।
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नवरात्रि में पांचवें दिन स्कंदमाता देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं।
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स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता देवी स्कंदमाता की उपासना नवरात्रि के पांचवें दिन की जाती है। आइए पढ़ें आरती...
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प्रतिदिन देवी सहस्रनामावली यानी दुर्गा के 1000 नाम का जाप करना बहुत लाभदायी है। मां दुर्गा के 1000 दुर्लभ नामों का जप हमें संसार की हर आपदा से, हर संकट और विघ्नों से बचाते हैं। जीवन को वैभवशाली और ऐश्वर्यशाली बनाते हैं। श्री देवी सहस्रनामावली के इन ...
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वेदी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में छब्बीस, शिवचरित्र में इक्यावन, दुर्गाप्तसति और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। यहां प्रस्तुत है मां दुर्गा के प्रसिद्ध 10 के चमत्कारिक और सिद्ध ...
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नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। नवरात्रि में इस दिन भी रोज की भांति सबसे पहले कलश की पूजा कर माता कूष्मांडा को नमन करें।
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