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Devi Siddhidatri ki Katha : आज होगी नवरात्रि की नौवीं देवी सिद्धिदात्री की आराधना, पढ़ें पावन कथा

मंगलवार,अप्रैल 20, 2021
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मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं सिद्धिदात्री। नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी तिथि को देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। पढ़ें आरती-
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नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं।
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नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व महानवमी पूजन का बड़ा ही महत्व है। इस अष्टमी व नवमी की कल्याणप्रद, शुभ बेला श्रद्धालु भक्तजनों को मनोवांछित फल देकर नव दिनों तक लगातार चलने वाले व्रत व पूजन महोत्सव के संपन्न
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चैत्र नवरात्रि अष्टमी तिथि पर कुछ विशेष उपाय करने से जातकों को समस्त प्रकार के दुखों, कष्टों और परेशानियों से छुटकारा मिलता है। ये उपाय इस प्रकार हैं-
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नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है।
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लॉकडाउन में आप खुद ही कैसे घर में हवन करें जानिए इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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कोरोना काल में आवश्यक सामाजिक दूरी का पालन करें और हो सके तो प्रतीकात्मक पूजा ही करें... संभव हो तो कन्याओं को भी सुरक्षा संबंधी जानकारी दें..मास्क और सेनेटाइजर भेंट में दें....
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20 अप्रैल को दुर्गाष्टमी: जानिए अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन कैसे करें कन्या पूजन
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जिस समय हमें जिस कार्य की आवश्यकता हो, उस कार्य के लिए हम मां के रूपों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। जाने किस बात के लिए कौन सी मां का स्मरण करें?
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नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान अष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है। सुंदर, अति गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है।
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नवरात्रि के पावन पर्व पर हवन करने का विशेष महत्व है अत: अगर आप कोरोना की वजह से घर पर ही सरल रीति से हवन करना चाहते है तो आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
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नवरात्रि की अष्टमी को आठम या अठमी भी कहते हैं। नवरात्रि की अष्टमी को महाष्टमी या दुर्गाष्टमी कहते हैं जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इस दिन माता के आठवें रूप महागौरी की पूजा और आराधना की जाती है। कलावती नाम की यह तिथि जया संज्ञक है। मंगलवार की ...
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नवरात्रि में देवी मां के सतवें स्वरूप कालरात्रि माता को गुड़ का भोग प्रिय है। सातवें नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है
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मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। इस देवी के तीन नेत्र हैं। ये तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं।
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दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है। माता अत्यंत दयालु-कृपालु हैं। यह देवी सर्वत्र विजय दिलाने वाली, मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली है।
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मां कात्यायनी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की।
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नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी को पूजा जाता है। यह देवी भक्तों के रोग, शोक, संताप और भय नष्ट करती हैं। आइए पढ़ें आरती-
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मां दुर्गा की छठी विभूति हैं मां कात्यायनी। शास्त्रों के मुताबिक जो भक्त दुर्गा मां की छठी विभूति कात्यायनी की आराधना करते हैं मां की कृपा उन पर सदैव बनी रहती है।
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नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा होती है, लेकिन क्या यह सच है कि सिर्फ नौ देवियों की ही पूजा होती है? क्या है नौ देवियों का रहस्य आओ जानते हैं इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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