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शारदीय नवरात्रि 2026: महाष्टमी पर विशेष पूजा और हवन की सरल विधि

Updated: बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 (14:11 IST)
Mahashtami Puja: शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि (महाष्टमी) का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही संधि पूजा, हवन, कन्या पूजन और पारण की परंपरा निभाई जाती है। घर पर ही सरल विधि से महाष्टमी की पूजा और हवन संपन्न करने की पूरी प्रक्रिया नीचे दी गई है:
 

1. महाष्टमी पूजा की सरल विधि

स्वच्छता एवं तैयारी
पूजन से पूर्व स्नान कर शरीर और मन को शुद्ध करें।
पूजा स्थल तथा माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र के स्थान को साफ और पवित्र करें।
स्थापना एवं पूजन
माँ दुर्गा या माँ महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक प्रज्वलित करें।
कलश, अक्षत, गंगाजल, रोली, पुष्प, वस्त्र तथा श्रृंगार सामग्री देवी को अर्पित करें।
मूल मंत्र एवं स्तोत्र पाठ
मूल मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः मंत्र का जाप करें।
ध्यान मंत्र:
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
देवी स्तुति:
या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
सप्तशती पाठ: दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ का वाचन करें। संधि पूजा के अवसर पर चामुण्डा/चण्ड-मुण्ड वध की कथा विशेष रूप से पढ़ें।
भोग एवं प्रसाद
माँ महागौरी को शुद्ध भोग (जैसे हलवा, पूरी, चना या खीर) अर्पित करें और बाद में इसे सभी में वितरित करें।
कन्या पूजन
अष्टमी के दिन 9 कन्याओं को देवी रूप मानकर आमंत्रित करें और उनका सम्मान करें।
उनके पैर धोएं, उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराएं और प्रसाद, उपहार व दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद लें।
आरती एवं वंदना
धूप-दीप से देवी माँ की आरती करें, मंत्रोच्चार से वंदना करें और क्षमा प्रार्थना करें।
 

2. हवन की तैयारी और सामग्री

आवश्यक सामग्री
हवन कुंड: तांबे का कुंड या 8 ईंटों से बना चौकोर कुंड (इसे मिट्टी या गोबर से लीपकर स्वास्तिक बनाएं और कलावा बांधें)।
मुख्य सामग्री: आम की सूखी लकड़ियां, शुद्ध घी, कपूर, अक्षत (चावल), जौ, काले तिल और शक्कर/बूरा।
विशेष आहुति: लौंग का जोड़ा, इलायची, बताशा, मखाने, सूखे मेवे और शहद।
 

3. हवन की सरल प्रक्रिया

अग्नि स्थापना: हवन कुंड में आम की लकड़ियां सजाकर कपूर की सहायता से अग्नि प्रज्वलित करें।
शुरुआती आहुति: सबसे पहले गणेश जी, अग्नि देव, नवग्रह, कुलदेवता और स्थान देवता के नाम से घी की आहुति दें।
देवी पूजन आहुति: मूल मंत्रों जैसे ॐ दुर्गाय नमः स्वाहा या ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा अथवा दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से आहुतियां दें।
विशेष भोग आहुति: अंत में खीर, फल और शहद मिलाकर आहुति प्रदान करें।
पूर्ण आहुति: एक सूखे नारियल (गोले) में छेद करके उसमें घी, पान, सुपारी, लौंग और बताशा भरें। इसे लाल कपड़े या कलावे से लपेटकर ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्... मंत्र बोलते हुए अग्नि में समर्पित करें।
समापन: परिवार सहित आरती करें, सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा निकालें और माँ से भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हुए सुख-समृद्धि की कामना करें।
 

4. हवन के मुख्य मंत्र (प्रत्येक मंत्र के अंत में 'स्वाहा' बोलकर आहुति दें)


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