भारत और चीन के बीच अब सोशल मीडिया पर जंग शुरू

सुरेश एस डुग्गर| Last Updated: शनिवार, 12 सितम्बर 2020 (19:48 IST)
जम्मू। सेक्टर में एलएसी (LAC) पर चीनी सेना के अतिक्रमण और कई इलाकों पर कब्जे के उपरांत भारतीय सैनिकों की तैनाती के बाद चीनी मीडिया तथा भारतीय सेना के बीच वाकयुद्ध भी आरंभ हो चुका है। सरकार नियंत्रित चीनी मीडिया जहां भारतीय जवानों की तैनाती पर कटाक्ष कर रहा है, वहीं भारतीय सेना इस दुष्प्रचार का जवाब देने के लिए अब का भी सहारा ले रही है।
दरअसल, चीन के सरकारी अखबार हू शिजिन की तरफ से परसों किया गया था जिसमें उन्होंने सर्दी के मौसम में भारतीय सेना को लेकर कई ऐसी बातें कहीं थीं। हू शिजिन ने अपनी ट्वीट में लिखा था कि अगर भारतीय जवान पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे से नहीं हटते हैं तो फिर पीएलए उन्हें पूरी सर्दी टक्कर देगी।

चीन के मुगालते : भारतीय जवानों के संसाधन बहुत खराब हैं और बहुत से भारतीय सैनिकों की मौत या तो खून जमा देने वाली सर्दी से हो जाएगी या फिर कोविड-19 से वह मर जाएंगे। अगर युद्ध हुआ तो फिर भारतीय सेना को तुरंत ही शिकस्त का सामना करना पड़ेगा।

हू शिजिन का यह ट्वीट ऐसे समय आया था जब कुछ ही दिनों पहले चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था उसे जल्द से जल्द लद्दाख में सैनिकों के पीछे हटने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इस बात की उम्मीद जताई थी कि जवान अपने कैंपिंग एरिया में चले जाएंगे और आने वाले दिनों में एलएसी के इलाकों में ज्यादा टकराव नहीं होगा।

यह सच है कि अब लद्दाख में कड़ी सर्दियों का मौसम शुरू होने को है। भारतीय सेना ने इस मौसम के लिए हर साजो-सामान इकट्ठा कर लिया है। पर चीनी मीडिया को लगता है कि भारतीय जवान कड़ी सर्दी का मुकाबला नहीं कर सकते हैं और ऐसे में वह युद्ध की स्थिति में अपने आप ही हार स्वीकार कर लेंगें।

भारतीय सेना ने भी संभाला मोर्चा : चीनी मीडिया के इस दुष्प्रचार का जवाब देने को अब भारतीय सेना मैदान में उतर आई है। भारतीय सेना के आधिकारिक टि्वटर हैंडल की तरफ से शनिवार को एक ट्वीट किया गया है। इस ट्वीट में लिखा है कि सैनिक, जब किसी कार्य के लिए प्रतिबद्ध होता है, तो समझौता नहीं कर सकता। यह कर्तव्य और साहस के मानकों के प्रति वचनबद्धता है, राष्ट्र के प्रति पूर्ण निष्ठा है। उद्देश्य प्राप्ति ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है। सेना ने जो फोटोग्राफ अपने मैसेज के साथ पोस्ट की है उसमें सैनिकों को एक जमी हुई झील पर मोर्चे की तरफ मार्च करते हुए देखा जा सकता है।

हर हाल में सक्षम हैं भारतीय सैनिक : भारतीय सैनिक पूरे साल सियाचिन, कारगिल और लेह जैसी जगहों पर तैनात रहते हैं। ये देश के ऐसे इलाके हैं जहां पर तापमान शून्य से 60 डिग्री नीचे तक पहुंच जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं, सेना की माउंटेन ब्रिगेड ने पैंगोंग झील की ऊंचाइयों पर अपना नियंत्रण किया हुआ है। इस ब्रिगेड के सैनिकों को कश्मीर से लेकर सियाचिन तक के हालातों का अनुभव है। ब्रिगेड पहाड़ों पर लड़ने में महारत रखती है। भारतीय सेना का कहना है कि भारतीय जवानों के प्रति और ज्यादा लिखने या कहने की जरूरत नहीं है।



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