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मनमोहन सिंह के अपमान के लिए खुद को भी माफ कर लें मोदी, कोयला घोटाले में क्लीन चिट के बाद सोनिया गांधी का तीखा तंज

Sonia Gandhi on Narendra Modi
Sonia Gandhi took aim at PM Modi: अगस्त 2026 में भारतीय राजनीति में एक पुराना और ऐतिहासिक अध्याय एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद कांग्रेस की शीर्ष नेता और संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा और तीखा हमला बोला है। सोनिया ने अपने विशेष लेख के जरिए पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि चूंकि प्रधानमंत्री इन दिनों उन छात्रों को 'माफ' कर रहे हैं, जिन्होंने उन पर हमला किया था, इसलिए उन्हें डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ की गई अपनी 'अमर्यादित टिप्पणी' के लिए खुद को भी माफ कर देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सोनिया गांधी का लेख

29 जुलाई 2026 को उच्चतम न्यायालय ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए डॉ. मनमोहन सिंह को पूरी तरह निर्दोष करार दिया। शीर्ष अदालत ने स्पेशल ट्रायल कोर्ट द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ बिना किसी ठोस आधार के प्रतिकूल टिप्पणियां करने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। इस बड़े अदालती फैसले के बाद सोनिया गांधी ने एक विशेष लेख में लिखा कि यह फैसला 'हमारे सार्वजनिक विमर्श के सबसे दुखद और दर्दनाक अध्यायों' में से एक का अंत है।
 
सोनिया गांधी ने लिखा कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चलाया गया अभियान पूरी तरह से सुनियोजित और योजनाबद्ध था। इसमें नौकरशाही, मीडिया का एक वर्ग, न्यायपालिका, नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) और संघ-भाजपा से जुड़े लोग शामिल थे। वर्षो तक चलाया गया वह 'बेबुनियाद क्रूसेड' आखिरकार शून्य साबित हुआ और डॉ. सिंह हर पैमाने पर निष्कलंक और निर्दोष साबित हुए। इतिहास डॉ. मनमोहन सिंह को एक शांत, सौम्य लेकिन देश के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में से एक के रूप में याद रखेगा। उनकी ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही का रिकॉर्ड वर्तमान सत्ता के कामकाज से पूरी तरह विपरीत है। ALSO READ: 'अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…' मनमोहन सिंह को लेकर SY कुरैशी की नई किताब में बड़ा खुलासा

2017 की विवादित ‘रेनकोट’ टिप्पणी का पुनर्जन्म

सोनिया गांधी ने अपने लेख में 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए उस चर्चित बयान का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि डॉ. मनमोहन सिंह को 'रेनकोट पहनकर नहाने की कला' आती है। सोनिया ने इस बयान को याद दिलाते हुए कहा कि यह 'भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे निचला और दुखद स्तर' था। 
 
उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल एक इत्तेफाक नहीं था कि नरेंद्र मोदी डॉ. सिंह की छवि को धूमिल करने वाले अभियानों के सबसे मुखर समर्थकों में शामिल थे। आत्मचिंतन को लेकर सोनिया ने लिखा कि दान की तरह आत्मचिंतन भी घर से ही शुरू होना चाहिए। आखिरकार डॉ. सिंह पर हमला उनके शानदार शासन के रिकॉर्ड से देश का ध्यान भटकाने की एक हताश कोशिश मात्र थी।

‘माफी’ के बहाने पीएम मोदी पर राजनीतिक तंज

हाल के दिनों में छात्र आंदोलनों और प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों के प्रति व्यक्त किए गए कुछ विचारों के संदर्भ को जोड़ते हुए सोनिया ने लिखा कि चूंकि प्रधानमंत्री इन दिनों उन छात्रों को अपने ऊपर हमला करने के लिए माफ कर रहे हैं, इसलिए शायद वे इस मौके का इस्तेमाल डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ अपनी अशोभनीय बदनामी के लिए खुद को भी माफ करने के लिए भी कर सकते हैं।

विरासत की बहाली और नैतिक प्रहार

सोनिया गांधी का यह हमला केवल पुरानी यादों को ताजा करने तक सीमित नहीं है। भाजपा के भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार करते हुए सोनिया ने आरोप लगाया कि जब कोई नेता विपक्ष में होता है तो भाजपा उस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाती है, लेकिन जैसे ही वह भाजपा के पाले में शामिल हो जाता है, वह पूरी तरह 'साफ' हो जाता है। उन्होंने कहा कि गंभीर और विश्वसनीय आरोपों पर वर्तमान सरकार पूरी तरह आंखें मूंद लेती है। ALSO READ: कोयला ब्लॉक आवंटन मामला, पूर्व PM मनमोहन सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बंद किया केस

क्या है कोयला ब्लॉक आवंटन मामला?

कोयला ब्लॉक आवंटन मामला, जिसे कोयला घोटाला भी कहा जाता है। भारत के सबसे बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों में से एक रहा है। यह मामला 1993 से 2010 के बीच केंद्र सरकार द्वारा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कोयला खदानों (Coal Blocks) के आवंटन में हुई अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी से जुड़ा है। यह मामला 2012 में तब सुर्खियों में आया जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की।
 
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच बिना किसी पारदर्शी बोली के, मनमाने ढंग से निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए। CAG का अनुमान था कि इस पारदर्शी प्रक्रिया का पालन न करने के कारण सरकारी खजाने को लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और चयनित कंपनियों को अनुचित लाभ मिला।

क्या थे मुख्‍य आरोप?

आवंटन के लिए 'स्क्रीनिंग कमेटी' बनाई गई थी, लेकिन उस पर आरोप लगा कि उसने बिना किसी स्पष्ट मानदंड या खुली नीलामी के पसंदीदा कंपनियों को खदानें बांटीं। कई ऐसी कंपनियों को कोयला खदानें आवंटित कर दी गईं जिनके पास न तो कोयला खनन का अनुभव था और न ही वित्तीय क्षमता। नेताओं, अधिकारियों और उद्योगपतियों की मिलीभगत से खदानें हासिल करने और उन्हें आगे मुनाफे पर बेचने के आरोप भी लगे।
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