PM मोदी ने योरपीय परिषद की बैठक में लिया हिस्सा, विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में हुए शामिल

Last Updated: शनिवार, 8 मई 2021 (21:28 IST)
नई दिल्ली। भारत और ने संतुलित, महत्वाकांक्षी एवं समग्र कारोबार समझौते और ‘स्टैंड-अलोन’ निवेश संरक्षण समझौता पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई। ने शनिवार को यह जानकारी दी।
इस संबंध में निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 27 सदस्यीय योरपीय संघ समूह के शासनाध्यक्षों या राष्ट्राध्यक्षों के बीच डिजिटल माध्यम से हुई शिखर बैठक में लिया गया। इस बैठक में कारोबार, सम्पर्क और निवेश के क्षेत्र सहित संपूर्ण सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों पक्षों ने टिकाऊ एवं समग्र संपर्क साझेदारी की शुरुआत की और इसे संबंधों का महत्वपूर्ण क्षण बताया। भारत-योरपीय संघ शिखर सम्मेलन पर विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने संवाददाताओं से कहा कि यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, बैठक ने संबंधों को नयी गति दी है।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और योरपीय संघ के नेताओं ने कोविड-19 महामारी एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ को कोविड-19 रोधी टीकों पर पेटेंट छोड़ने के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ +27 के प्रारूप में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के नेताओं के साथ संवाद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल के निमंत्रण पर विशेष आमंत्रित के रूप में यूरोपीय परिषद की बैठक में भाग लिया।
मंत्रालय के अनुसार शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शुरूआती संबोधन में भारत और योरपीय संघ के साथ योरपीय संघ के सभी सदस्य देशों के साथ मजबूत संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारत और योरपीय संघ के सामरिक संबंधों को 21वीं सदी में वैश्विक भलाई के लिए महत्वपूर्ण ताकत बताया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में यूरोपीय संघ परिषद एवं यूरोपीय संघ आयोग के अध्यक्षों के अलावा समूह के 19 सदस्य देशों के नेताओं ने संबोधित किया। योरपीय संघ परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने ट्वीट किया कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं ईयू नेताओं की शिखर बैठक में योरपीय संघ-भारत की सामरिक साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं।
भारत-योरपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और योरपीय संघ (ईयू) संतुलित, महत्वाकांक्षी और समग्र व्यापार समझौता के लिए वार्ता बहाल करने पर सहमत हुए। मंत्रालय ने कहा कि भारत और योरपीय संघ ‘स्टैंड-अलोन’ निवेश संरक्षण समझौता पर बातचीत शुरू करने के लिए सहमत हुए। वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ट्वीट में कहा कि शिखर बैठक में यूरोपीय संघ के सदस्यों ने वास्तविक अर्थों में एकजुटता प्रदर्शित की।
विदेश मंत्रालय द्वारा भारत-योरपीय संघ के नेताओं की बैठक के संबंध में जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘आज की बैठक में साझे हितों, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, कानून के शासन एवं मानवाधिकारों का सम्मान जैसे मूल्यों एवं सिद्धांतों को रेखांकित किया गया जो हमारी सामरिक साझेदारी का मूल है। ’

दोनों पक्षों ने जुलाई 2020 में पिछली शिखर बैठक के बाद एवं हाल के समय में उनके बीच साझेदारी में आई गति की सराहना की। संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस संदर्भ में दोनों पक्षों ने भारत-योरपीय संघ ढांचा 2025 को लेकर तय कार्य बिन्दुओं को लागू करने तथा आज लिये गए नये फैसलों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
इसमें कहा गया है कि हमने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि दुनिया के बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत और योरपीय संघ का बहु ध्रुवीय विश्व में सुरक्षा, समृद्धि और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में साझा हित है।

बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस दिशा में हुई प्रगति को और आगे बढ़ाने तथा टिकाऊ विकास एवं पेरिस समझौता 2030 के एजेंडे पर सुरक्षित, हरित, अधिक डिजिटल एवं स्थिर विश्व की दिशा में संयुक्त रूप से योगदान देने पर सहमति व्यक्त की ।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच भारत-योरपीय संघ साझेदारी तथा पुणे मेट्रो रेल परियोजना के संबंध में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों पक्षों ने कोविड-19 की स्थिति एवं स्वास्थ्य संबंधी तैयारी के बारे में भी चर्चा की।

बयान में कहा गया है कि हम महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर उत्पन्न कठिन परिस्थितियों को समझते हैं। हम इस महामारी के कारण भारत, यूरोप तथा शेष दुनिया में जान गंवाने वालों के प्रति शोक प्रकट करते हैं एवं पी़ड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री का भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक में हिस्सा लेने पुर्तगाल जाने का कार्यक्रम था लेकिन देश में कोविड-19 के संक्रमण की दूसरी लहर के कारण उत्पन्न संकट को देखते हुए यह यात्रा स्थगित कर दी गई थी और दोनों पक्षों ने डिजिटल माध्यम से बैठक करने का निर्णय किया था।

योरपीय संघ, भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समूह है और यह 2018 में भारत का सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी रहा है। योरपीय संघ के साथ भारत का द्विपक्षीय कारोबार वर्ष 2018-19 में 115.6 अरब डॉलर का था, जिसमें निर्यात 57.17 अरब डॉलर तथा आयात 58.42 अरब डॉलर का रहा। (भाषा)



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