पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बारे में 10 खास बातें

Pranab Mukherjee
वेबदुनिया न्यूज डेस्क|
1. प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 बीरभूम जिले के मिरती गांव में 11 दिसंबर, 1935 को हुआ था और 31 अगस्त 2020 को दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली।
2. प्रणब मुखर्जी के पिता कामदा किंकर मुखर्जी देश के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और 1952 से 1964 के बीच बंगाल विधायी परिषद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि रहे थे। उनकी मां का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी था।

3. प्रणब मुखर्जी का 13 जुलाई 1957 को शुभ्रा मुखर्जी से विवाह हुआ था। उनके दो बेटे और एक बेटी है।

4. प्रणब मुखर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर के साथ साथ कानून की डिग्री हासिल की थी। वे एक वकील और कॉलेज प्राध्यापक भी रह चुके थे। उन्हें मानद डी.लिट उपाधि भी प्रदान की गई थी। उन्होंने पहले एक कॉलेज प्राध्यापक के रूप में और बाद में एक पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया था।
5. प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक सफर 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) शुरू हुआ था।

6. वे सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे। 1984 में प्रणब मुखर्जी भारत के वित्त मंत्री बने। 1984 में, यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में वे दुनिया के 5 सर्वोत्तम वित्तमंत्रियों में शामिल थे।

7. प्रणब मुखर्जी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव के बाद राजीव गांधी की समर्थक मंडली ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने दिया। कुछ समय के लिए उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया। उन्होंने अपने राजनीतिक दल राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का गठन किया, लेकिन 1989 में राजीव गांधी के साथ समझौता होने के बाद उन्होंने अपने दल का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया था।
8. पीवी नरसिंह राव ने उन्हें योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में और बाद में एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के तौर पर नियुक्त करने का फैसला किया था। उन्होंने राव के मंत्रिमंडल में 1995 से 1996 तक पहली बार विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया था।

9. मनमोहन सिंह की दूसरी सरकार में मुखर्जी भारत के वित्तमंत्री बने थे और 6 जुलाई 2009 को उन्होंने सरकार का वार्षिक बजट पेश किया।
10. प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति रहे।



और भी पढ़ें :