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नेपाल में Earthquake से तबाही, जानिए क्यों आते हैं भूकंप...

Updated: बुधवार, 9 नवंबर 2022 (10:32 IST)
काठमांडू। पश्चिमी नेपाल में मंगलवार देर रात आए 6.6 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई जबकि 5 अन्य लोग घायल हो गए। नेपाल के राष्ट्रीय भूकंप निगरानी केंद्र के अनुसार नेपाल में देर रात 2 बजकर 12 मिनट पर 6.6 तीव्रता का भूकंप आया जिसका केंद्र डोटी जिले में था।
 
डोटी जिले के पुलिस उपाधीक्षक भोला भट्टा ने बताया कि भूकंप के दौरान कई मकान क्षतिग्रस्त हुए और उसके मलबे में दबने से कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई। भूकंप संबंधी घटनाओं में 5 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।
 
उल्लेखनीय है कि नेपाल में अप्रैल 2015 में 7.8 की तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में करीब 9 हजार लोग मारे गए थे और करीब 22 हजार अन्य लोग घायल हुए थे। इसमें 8 लाख से अधिक मकान, स्कूल व अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं थीं।
 
कैसे आता है भूकंप? : हमारी धरती मुख्य तौर पर 4 परतों से बनी हुई है- इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टलऔर क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत वर्गों में बंटी हुई है जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं। लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और उर्ध्वाधर दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट, दूसरी के नीचे आ जाती है।
 
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता? : भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन् 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।
 
इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह प्रति स्केल 32 गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुना बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।
 
भूकंप को मापने के लिए रिक्टर के अलावा मरकेली स्केल का भी इस्तेमाल किया जाता है, पर इसमें भूकंप को तीव्रता की बजाए ताकत के आधार पर मापते हैं। इसका प्रचलन कम है, क्योंकि इसे रिक्टर के मुकाबले कम वैज्ञानिक माना जाता है। भूकंप के कारण होने वाले नुकसान के लिए कई कारण जिम्मेवार हो सकते हैं, जैसे घरों की खराब बनावट, खराब संरचना, भूमि का प्रकार, जनसंख्या की बसावट आदि।
 
भारत में भूकंप का खतरा कितना? : भारतीय उपमहाद्वीप में भूकंप का खतरा हर जगह अलग-अलग है। भारत को भूकंप के क्षेत्र के आधार पर 4 हिस्सों जोन-2, जोन-3, जोन-4 तथा जोन-5 में बांटा गया है। जोन 2 सबसे कम खतरे वाला जोन है तथा जोन-5 को सर्वाधिक खतनाक जोन माना जाता है।
 
उत्तर-पूर्व के सभी राज्य, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से जोन-5 में ही आते हैं। उत्तराखंड के कम ऊंचाई वाले हिस्सों से लेकर उत्तरप्रदेश के ज्यादातर हिस्से तथा दिल्ली जोन-4 में आते हैं। मध्यभारत अपेक्षाकृत कम खतरे वाले हिस्से जोन-3 में आता है जबकि दक्षिण के ज्यादातर हिस्से सीमित खतरे वाले जोन-2 में आते हैं।
 
हालांकि राजधानी दिल्ली में ऐसे कई इलाके हैं, जो जोन-5 की तरह खतरे वाले हो सकते हैं। इस प्रकार दक्षिण राज्यों में कई स्थान ऐसे हो सकते हैं, जो जोन-4 या जोन-5 जैसे खतरे वाले हो सकते हैं। दूसरे जोन-5 में भी कुछ इलाके हो सकते हैं, जहां भूकंप का खतरा बहुत कम हो और वे जोन-2 की तरह कम खतरे वाले हों।
 
Edited by: Ravindra Gupta

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