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खुले केदारनाथ के कपाट, इस यात्रा से जुड़ी खास बातें...

Updated: रविवार, 29 अप्रैल 2018 (08:57 IST)
केदारनाथ। भोले बाबा के जयकारों के साथ केदारनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह खोल दिए गए। इसके साथ ही चारधाम यात्रा आज से शुरू हो गई। मंदिर कपाट खुलते मंदिर में दर्शन कार्यक्रम शुरू हो गया।
 
जिला प्रशासन, मंदिर समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर के दक्षिणी गेट की सील खोली गई फिर रावल, मुख्य पुजारी मंदिर समिति के कर्मचारियों और हक-हकूकधारियों के मंदिर में प्रवेश के बाद गर्भगृह पर लगी सील खोली गई। इसके बाद मुख्य द्वार भी खोला गया।
 
शीतकाल में यहां होती है बाबा की पूजा : 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ के कपाट छह महीने बंद रहते हैं और छह महीने के लिए खोले जाते हैं। शीतकाल में केदार की पूजा उनके शीतकालीन गद्दी स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है। 

केदारनाथ धाम का परिचय : केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित है। केदारनाथ धाम और मंदिर तीन तरफ पहाड़ों से घिरा है। एक तरफ है करीब 22 हजार फुट ऊंचा केदारनाथ, दूसरी तरफ है 21 हजार 600 फुट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ है 22 हजार 700 फुट ऊंचा भरतकुंड। न सिर्फ तीन पहाड़ बल्कि पांच ‍नदियों का संगम भी है यहां- मं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी। इन नदियों में से कुछ का अब अस्तित्व नहीं रहा लेकिन अलकनंदा की सहायक मंदाकिनी आज भी मौजूद है। इसी के किनारे है केदारेश्वर धाम। यहां सर्दियों में भारी बर्फ और बारिश में जबरदस्त पानी रहता है। समुद्रतल से 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां पहुंचना सबसे कठिन है। 

जानिए, क्या है केदारनाथ का इतिहास...
क्या है मंदिर के गर्भग्रह में खास : यह उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है, जो कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। ये शिलाखंड भूरे रंग के हैं। मंदिर लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है। इसका गर्भगृह अपेक्षाकृत प्राचीन है जिसे 80वीं शताब्दी के लगभग का माना जाता है।  मंदिर के गर्भगृह में अर्धा के पास चारों कोनों पर चार सुदृढ़ पाषाण स्तंभ हैं, जहां से होकर प्रदक्षिणा होती है। अर्धा, जो चौकोर है, अंदर से पोली है और अपेक्षाकृत नवीन बनी है। सभामंडप विशाल एवं भव्य है। उसकी छत चार विशाल पाषाण स्तंभों पर टिकी है। विशालकाय छत एक ही पत्थर की बनी है। गवाक्षों में आठ पुरुष प्रमाण मूर्तियां हैं, जो अत्यंत कलात्मक हैं।
 
कैसे जाएं केदारनाथ : समुद्र तल से 3,581 मी. की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ जाने के लिए ऋषिकेश से 207 किमी तक वाहन से गौरीकुंड तक जाना पड़ता है तथा वहां से लगभग 19 किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। 

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